France में Heatwave बनी ‘साइलेंट किलर’, सिर्फ 16 दिनों में 20 हजार से ज्यादा मौतें
France Heatwave: फ्रांस में इस साल की भीषण गर्मी ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है। जून के आखिरी सप्ताह से जुलाई की शुरुआत तक चली हीटवेव के दौरान देश में 16 दिनों में 21,674 लोगों की मौत दर्ज की गई। फ्रांस की पब्लिक हेल्थ एजेंसी के मुताबिक, यह संख्या सामान्य अवधि की तुलना में 5,764 अधिक है। आमतौर पर इस दौरान करीब 15,910 मौतें होती हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि सभी मौतें सीधे गर्मी की वजह से नहीं हुईं, लेकिन भीषण तापमान ने पहले से बीमार लोगों की हालत बिगाड़ दी, जिससे मौतों का आंकड़ा तेजी से बढ़ गया। स्वास्थ्य विशेषज्ञ अब हीटवेव को एक ‘साइलेंट किलर’ मान रहे हैं, जो बिना किसी बड़े शोर के हजारों जानें ले रही है।
स्वास्थ्य एजेंसी के अनुसार, 17 जून से 2 जुलाई के बीच France में दर्ज मौतों की संख्या सामान्य से करीब 36 फीसदी अधिक रही। शुरुआती अनुमान में नुकसान कम माना गया था, लेकिन बाद में मिले आंकड़ों ने स्थिति की गंभीरता उजागर कर दी। इस दौरान अस्पतालों, नर्सिंग होम और इमरजेंसी सेवाओं पर भी भारी दबाव देखने को मिला।
सबसे ज्यादा खतरे में बुजुर्ग

अतिरिक्त मौतों में लगभग दो-तिहाई लोग 75 वर्ष या उससे अधिक उम्र के थे। डॉक्टरों के मुताबिक, उम्र बढ़ने के साथ शरीर की तापमान नियंत्रित करने की क्षमता कम हो जाती है, जिससे तेज गर्मी जानलेवा साबित हो सकती है।
करीब आधी अतिरिक्त मौतें अस्पतालों में दर्ज की गईं, जबकि बड़ी संख्या में लोगों की मौत नर्सिंग होम और घरों में भी हुई। पेरिस और उसके आसपास के इलाकों में सबसे अधिक असर देखने को मिला, जहां करीब 2,000 अतिरिक्त मौतें दर्ज की गईं।
‘अतिरिक्त मौतें’ क्या होती हैं?
किसी आपदा या असामान्य स्थिति के प्रभाव का आकलन करने के लिए स्वास्थ्य एजेंसियां ‘अतिरिक्त मौतों’ (Excess Deaths) का आंकड़ा देखती हैं। इसमें किसी निश्चित अवधि के दौरान हुई वास्तविक मौतों की तुलना सामान्य परिस्थितियों में होने वाली औसत मौतों से की जाती है। इससे यह समझने में मदद मिलती है कि किसी घटना का वास्तविक प्रभाव कितना गंभीर रहा।
अत्यधिक गर्मी शरीर में पानी की कमी (डिहाइड्रेशन) पैदा कर सकती है और दिल, फेफड़ों व किडनी जैसे महत्वपूर्ण अंगों पर अतिरिक्त दबाव डालती है। जिन लोगों को पहले से हृदय, श्वसन या अन्य गंभीर बीमारियां होती हैं, उनके लिए हीटवेव का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।
क्लाइमेट चेंज बढ़ा रहा खतरा
वैज्ञानिकों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन (Climate Change) की वजह से यूरोप में हीटवेव पहले की तुलना में अधिक बार और लंबे समय तक रहने लगी हैं। वर्ष 2003 में भी यूरोप में आई भीषण गर्मी के दौरान करीब 70 हजार लोगों की मौत होने का अनुमान लगाया गया था।
France की 2026 की Heatwave ने एक बार फिर संकेत दिया है कि बढ़ती गर्मी अब सिर्फ मौसम की घटना नहीं, बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए गंभीर चुनौती बन चुकी है। विशेषज्ञों का कहना है कि समय रहते अलर्ट सिस्टम, स्वास्थ्य तैयारियों और जनजागरूकता को मजबूत करना बेहद जरूरी होगा।
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