हमीरपुर में 500 साल पुरानी अनोखी परंपरा, घूंघट में कुश्ती लड़ती हैं गांव की महिलाएं
Hamirpur News: उत्तर प्रदेश के हमीरपुर जिले का लोदीपुर निवादा गांव अपनी अनोखी परंपरा के लिए जाना जाता है। यहां रक्षाबंधन के दूसरे दिन महिलाओं का खास दंगल आयोजित होता है। गांव की बहुएं, सासें और बुजुर्ग महिलाएं साड़ी और घूंघट में अखाड़े में उतरती हैं। यहां महिलाएं एक-दूसरे को चुनौती देती हैं और कुश्ती के दांव-पेंच दिखाती हैं।
इस आयोजन की सबसे खास बात यह है कि दंगल में पुरुषों की एंट्री नहीं होती। पहलवानों से लेकर रेफरी और दर्शकों तक सभी महिलाएं होती हैं। ढोल बजाने और दूसरी व्यवस्थाओं की जिम्मेदारी भी महिलाएं ही संभालती हैं।
20 से ज्यादा कुश्तियां हुईं
आयोजकों के अनुसार इस साल भी दंगल में 20 से अधिक कुश्तियां कराई गईं। बड़ी संख्या में महिलाओं ने इसमें हिस्सा लिया। मुकाबले जीतने वाली महिला पहलवानों को सम्मानित भी किया गया।
घूंघट में महिलाओं को अखाड़े में जोर आजमाइश करते देखना लोगों के लिए खास आकर्षण रहता है। यह आयोजन अब गांव की सांस्कृतिक पहचान बन चुका है।
अंग्रेजों के दौर से जुड़ी है मान्यता
स्थानीय लोगों के मुताबिक इस परंपरा की शुरुआत करीब 500 साल पहले हुई थी। गांव में प्रचलित मान्यता के अनुसार अंग्रेजी शासन के समय पुरुष कई बार अत्याचार से बचने के लिए गांव से बाहर चले जाते थे।
ऐसे समय महिलाओं ने परिवार और खुद की सुरक्षा के लिए आत्मरक्षा के तरीके सीखने शुरू किए। उन्होंने कुश्ती के दांव-पेंच भी सीखे। धीरे-धीरे महिलाओं की यह जोर आजमाइश परंपरा बन गई। पीढ़ी दर पीढ़ी यह आयोजन चलता रहा।
आज भी महिलाएं पूरे उत्साह से इस परंपरा को निभाती हैं। घूंघट में अखाड़े में उतरकर दमखम दिखाने वाली महिलाएं इस विरासत को आगे बढ़ा रही हैं।

