बस्ती से विदेश पहुंचा 25 हजार कुंतल शीरा, यूपी की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिला ग्लोबल बाजार
UP News: उत्तर प्रदेश में कृषि आधारित उद्योग अब स्थानीय बाजार के साथ विदेशी बाजारों में भी अपनी जगह बना रहे हैं। बस्ती से 25 हजार कुंतल शीरे का विदेश निर्यात इसका बड़ा उदाहरण है। इससे करीब 5 लाख अमेरिकी डॉलर की विदेशी मुद्रा प्रदेश को मिली है। शीरा अलग शुल्क वर्गीकरण में आता है, इसलिए इससे हुई कमाई मुख्य आबकारी निर्यात आंकड़ों में शामिल नहीं है।
गन्ने और अनाज से जुड़े उद्योगों को वैश्विक बाजार मिलने से कच्चे माल के प्रसंस्करण और मूल्यवर्धन की संभावनाएं बढ़ी हैं। गन्ने से चीनी के अलावा शीरा जैसे उप-उत्पाद भी तैयार होते हैं, जिनका निर्यात अब विदेशी बाजारों तक हो रहा है।
पहली तिमाही में 45.4% बढ़ा निर्यात
योगी सरकार की त्रिवर्षीय आबकारी निर्यात नीति 2026-29 का लक्ष्य उत्पादन बढ़ाने और निर्यात को प्रोत्साहन देना है। वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में यूपी का आबकारी निर्यात पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले 45.4% बढ़ा। इस दौरान राष्ट्रीय स्तर पर वृद्धि 18.3% रही।
अप्रैल-जून 2026 में यूपी का आबकारी निर्यात 127.8 लाख डॉलर रहा, जो पिछले साल 87.9 लाख डॉलर था। यानी करीब 39.9 लाख डॉलर की बढ़ोतरी हुई। बस्ती के शीरे से मिली 5 लाख डॉलर की राशि अलग है।
खेत से विदेशी बाजार तक बन रही चेन
आबकारी आयुक्त डॉ. आदर्श सिंह ने बताया कि निर्यात बढ़ने का फायदा सिर्फ आबकारी इकाइयों तक सीमित नहीं है। गन्ना, शीरा और अनाज से लेकर बोतल, पैकेजिंग, ढक्कन, लेबलिंग, भंडारण और परिवहन तक कई क्षेत्र इससे जुड़े हैं। निर्यात बढ़ने पर इन क्षेत्रों में भी आर्थिक गतिविधियां बढ़ती हैं। इससे खेत से फैक्ट्री और फिर विदेशी बाजार तक पूरी एक्सपोर्ट चेन मजबूत हो रही है।
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