लखनऊ में 100 ‘टेस्ट ट्यूब बेबी’ ने अपनी डॉक्टर मॉम को कहा शुक्रिया, भावुक हुए सैकड़ों परिवार
अजंता हॉस्पिटल में भावुक मिलन: बांझपन अभिशाप नहीं, समय पर इलाज ही सफलता की कुंजी, डॉ. गीता खन्ना ने दिया फर्टिलिटी जागरूकता का संदेश
Sandesh Wahak Digital Desk: बांझपन का इलाज संभव है, और संवेदनशीलता के साथ उठाया गया सही कदम ही परिवारों के सपने साकार करता है। इसी सकारात्मक संदेश के साथ राजधानी के प्रसिद्ध अजंता हॉस्पिटल एवं IVF सेंटर में ‘टेस्ट ट्यूब बेबी मीट’ का भव्य आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम उन परिवारों के संघर्ष और आधुनिक चिकित्सा विज्ञान की जीत का एक जीवंत उत्सव बन गया।
100 से अधिक बच्चों का अपनी ‘डॉक्टर मॉम’ से मिलन
इस खास समारोह में IVF तकनीक के माध्यम से जन्मे 100 से अधिक बच्चे अपने माता-पिता के साथ प्रख्यात IVF विशेषज्ञ डॉ. गीता खन्ना से मिलने पहुंचे। कार्यक्रम में आए बच्चे आज शिक्षा और तकनीक जैसे विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रहे हैं। डॉ. खन्ना ने बताया कि ये बच्चे पूरी तरह स्वस्थ और सामान्य हैं, जो समाज में IVF को लेकर फैली भ्रांतियों को दूर करने का सबसे बड़ा प्रमाण हैं। कई माता-पिता ने अपनी बरसों पुरानी संतान प्राप्ति की तड़प और अंततः मिली सफलता की कहानियाँ साझा कीं, जिससे माहौल काफी भावुक हो गया।

बढ़ता बांझपन: जीवनशैली और देरी बनी मुख्य कारण
चर्चा के दौरान डॉ. गीता खन्ना ने बढ़ते बांझपन (Infertility) पर चिंता व्यक्त करते हुए महत्वपूर्ण सुझाव दिए।
- सही उम्र: गर्भधारण के लिए 22 से 30 वर्ष की आयु सबसे उपयुक्त है। 35 वर्ष के बाद फर्टिलिटी में गिरावट आने लगती है।
- प्रमुख कारण: देर से शादी, करियर की प्राथमिकताएं, तनाव, मोटापा, महिलाओं में PCOS/थायरॉइड और पुरुषों में शुक्राणुओं की कमी इसके मुख्य कारण हैं।
- जांच है जरूरी: विशेषज्ञों ने जोर दिया कि दोनों पार्टनर्स की समय पर हार्मोनल जांच और सीमेन एनालिसिस बेहद जरूरी है।
सफलता के मंत्र: क्या करें और क्या न करें?
डॉक्टरों ने फर्टिलिटी बेहतर करने के लिए जीवनशैली में सुधार के सुझाव दिए।
- संतुलित आहार: पोषण युक्त भोजन लें।
- वजन नियंत्रण: नियमित व्यायाम करें और मोटापे से बचें।
- बुरी आदतों का त्याग: धूम्रपान और शराब से पूरी तरह दूरी बनाएं।
- जागरूकता: बांझपन को छुपाने के बजाय विशेषज्ञ से सलाह लें।
यह आयोजन आधुनिक चिकित्सा की सफलता का प्रमाण होने के साथ-साथ समाज में बांझपन को लेकर सकारात्मक सोच विकसित करने का एक सशक्त मंच साबित हुआ।
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