‘महिला आरक्षण के नाम पर जनगणना और पिछड़ों का हक चुरा रही भाजपा’, अखिलेश यादव का बीजेपी पर हमला

Sandesh Wahak Digital Desk: समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने लोकसभा में ‘महिला आरक्षण संशोधन विधेयक 2026’ और ‘परिसीमन विधेयक’ पर चर्चा के दौरान केंद्र सरकार को जमकर घेरा। उन्होंने भाजपा की मंशा पर सवाल उठाते हुए इसे ‘खुफिया लोगों की गुप्त योजना’ और राजनीतिक लाभ के लिए बुना गया ‘षड्यंत्र’ करार दिया।

‘नारी’ सिर्फ नारा, नीयत में खोट

अखिलेश यादव ने कहा कि भाजपा महिलाओं को आरक्षण देने के नाम पर केवल ‘नारी’ को चुनावी नारा बनाने की कोशिश कर रही है। उन्होंने सत्तापक्ष से तीखे सवाल पूछे। “भाजपा जिस मातृ संगठन (RSS) से निकली है, वहां कितनी महिलाएं हैं और उन्हें कितना सम्मान प्राप्त है?” “21 राज्यों में भाजपा और सहयोगियों की सरकारें हैं, लेकिन वहां कितनी महिला मुख्यमंत्री बनाई गई हैं? दिल्ली की मुख्यमंत्री को भी ‘हाफ सीएम’ बनाकर रखा गया है।” अखिलेश ने दावा किया कि भाजपा के देश भर के विधायकों में महिलाओं की संख्या 10% भी नहीं है।

जातीय जनगणना से बचने की कोशिश

सपा प्रमुख ने आरोप लगाया कि भाजपा नई जनगणना और जातीय जनगणना को टालने के लिए आनन-फानन में यह बिल लाई है। “भाजपा जानती है कि जनगणना होगी तो देश ‘जातीय जनगणना’ मांगेगा और आंकड़े सामने आते ही जनता अपना हक मांगेगी। इसी हक को दबाने के लिए पुरानी जनगणना (2011) के आधार पर बिल लाया जा रहा है।”

600 सीटों का षड्यंत्र और अयोध्या की चेतावनी

अखिलेश यादव ने परिसीमन (Delimitation) के जरिए चुनावी नक्शा बदलने की योजना पर सरकार को चेतावनी दी। परिसीमन के बाद यूपी में लोकसभा की सीटें 120 और विधानसभा की सीटें 600 होने का अनुमान है। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार महिला आरक्षण के बहाने परिसीमन का जो गुप्त नक्शा लागू करना चाहती है, अगर उसमें कोई भी षड्यंत्र हुआ, तो भाजपा उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव वैसे ही हारेगी जैसे अयोध्या का लोकसभा चुनाव हारी है।

मुस्लिम और पिछड़ी महिलाओं के लिए अलग कोटा

सपा नेता ने मांग की कि आरक्षण के भीतर आरक्षण (कोटे में कोटा) होना चाहिए। उन्होंने कहा कि ‘पी़डीए’ में ‘ए’ का मतलब ‘आधी आबादी’ है। जब पिछड़ों की आबादी 70% है, तो उनकी महिलाओं के हक की बात इस बिल में क्यों नहीं है? उन्होंने सवाल उठाया कि क्या सरकार आधी आबादी में मुस्लिम महिलाओं को नहीं गिनती? सपा की मांग है कि पिछड़ी और मुस्लिम महिलाओं को जोड़कर आरक्षण दिया जाए।

रोटेशन प्रणाली और पार्टी स्तर पर आरक्षण का सुझाव

अखिलेश ने क्षेत्रों के रोटेशन का विरोध करते हुए कहा कि इससे नेताओं का जनता से भावनात्मक लगाव खत्म हो जाएगा। उन्होंने सुझाव दिया कि आरक्षण क्षेत्र के बजाय पार्टी स्तर पर तय हो, ताकि पार्टियां खुद महिलाओं को टिकट दें और चुनाव लड़ाएं।

नोएडा और मेरठ की महिलाओं का दर्द

अखिलेश यादव ने महंगाई और बेरोजगारी का जिक्र करते हुए कहा कि आज सबसे ज्यादा दुखी महिलाएं ही हैं। उन्होंने चुनौती दी कि अगर यह बिल इतना ही अच्छा है, तो सरकार इसे नोएडा के 40 हजार आंदोलनरत मजदूरों और मेरठ की उन महिलाओं के बीच जाकर घोषित करे जो अपने उजड़ते घरों के लिए न्याय मांग रही हैं।

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