Balrampur News: अनुदानित मदरसे में वेतन निर्धारण पर उठे सवाल, सरकारी खजाने को नुकसान का आरोप
Balrampur News: जनपद बलरामपुरके तुलसीपुर स्थित राज्य अनुदानित मदरसा दारुल उलूम अतीकिया में वेतन निर्धारण, वार्षिक वेतन वृद्धि और बोनस वितरण को लेकर गंभीर वित्तीय अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं।
सिद्धार्थनगर निवासी अब्दुर्रहीम ने जिलाधिकारी समेत शासन स्तर के अधिकारियों को शिकायत भेजकर मामले की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच की मांग की है।
अलग-अलग नियुक्ति, फिर भी समान मूल वेतन का आरोप
शिकायत के मुताबिक, मदरसे में शिक्षकों की नियुक्तियां जनवरी 2015 और जनवरी-फरवरी 2016 में हुई थीं।
दोनों नियुक्तियों के बीच करीब एक वर्ष का अंतर होने के बावजूद आरोप है कि आलिया और फौकानिया संवर्ग के चार-चार शिक्षकों का मूल वेतन विभागीय और कोषागार अभिलेखों में समान दर्ज है।
शिकायतकर्ता ने इसे वेतन निर्धारण के नियमों के विपरीत बताते हुए सेवा पुस्तिकाओं, वेतन निर्धारण आदेशों और कोषागार रिकॉर्ड का मिलान कराने की मांग की है।
एक वित्तीय वर्ष में दो बार बोनस देने का आरोप
शिकायत में वर्ष 2022 में एक ही वित्तीय वर्ष के दौरान कर्मचारियों को कथित तौर पर दो बार दीपावली बोनस दिए जाने का भी आरोप लगाया गया है।
इसके अलावा दूसरे मदरसे में तैनात लिपिक अजीज अहमद अंसारी पर बिना सक्षम अनुमति के दारुल उलूम अतीकिया के प्रशासनिक और वित्तीय कार्यों में हस्तक्षेप करने का आरोप लगाया गया है।
शिकायतकर्ता का दावा है कि कथित अनियमितताएं करीब 10 वर्षों से चली आ रही हैं और इससे सरकारी खजाने को नुकसान हुआ है।
उन्होंने जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई और यदि अतिरिक्त भुगतान हुआ है तो उसकी वसूली की मांग की है।
शुरुआती जांच में जुटा विभाग
मामले की जांच के लिए मंगलवार को मदरसे पहुंचे वित्त लेखाधिकारी रमेश सिंह यादव ने बताया कि फिलहाल प्रारंभिक जांच की जा रही है।
उन्होंने कहा कि शिकायत में लगाए गए आरोपों का व्यक्तिगत सत्यापन किया जा रहा है और जांच पूरी होने के बाद ही किसी निष्कर्ष पर पहुंचा जा सकेगा।
अब जांच रिपोर्ट के बाद ही स्पष्ट होगा कि मदरसे में वेतन निर्धारण और बोनस को लेकर लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है और क्या वास्तव में सरकारी धन का गलत भुगतान हुआ है।
रिपोर्ट- योगेंद्र त्रिपाठी
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