Kanpur News: ओआरएस और जिंक से बच सकती है मासूमों की जान, दस्त से यूपी में हर साल 28 हजार बच्चों की मौत

Kanpur News: विश्व ओआरएस सप्ताह के अवसर पर एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स कानपुर द्वारा जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के बाल रोग विभाग में एक प्रेस वार्ता का आयोजन किया गया। इस दौरान एकेडमी के अध्यक्ष डॉ. जेके गुप्ता, सचिव डॉ. शैलेन्द्र गौतम, डॉ. अरुण आर्या और डॉ. अमितेश यादव ने हिस्सा लिया। डॉक्टरों ने बताया कि दस्त (डायरिया) के दौरान शरीर में होने वाली पानी की कमी मासूम बच्चों के लिए जानलेवा साबित होती है, जबकि ओआरएस (ORS) घोल और जिंक की मदद से बेहद आसान तरीके से इन मौतों को रोका जा सकता है।

दुनिया भर में डायरिया का कहर, उत्तर प्रदेश में स्थिति चिंताजनक

प्रेस वार्ता के दौरान डॉ. जेके गुप्ता ने वैश्विक और राष्ट्रीय आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि पूरी दुनिया में हर साल दस्त के कारण लगभग 12 लाख लोग अपनी जान गंवाते हैं, जिनमें 4.43 लाख से अधिक 5 वर्ष से कम उम्र के मासूम शामिल हैं। भारत में यह आंकड़ा सालाना 4.62 लाख मौतों का है। सबसे अधिक फिक्र उत्तर प्रदेश की स्थिति को लेकर है, जहाँ प्रतिवर्ष 5 साल से छोटे लगभग 28,000 बच्चों की मौत दस्त से होती है। विशेषज्ञों का मानना है कि सही समय पर ओआरएस और जिंक देकर इनमें से करीब 95 फीसदी बच्चों को बचाया जा सकता है।

यूपी में आधे बच्चों को नहीं मिल पाता ओआरएस

डॉ. शैलेन्द्र गौतम ने एनएफएचएस-5 (NFHS-5) के आंकड़ों का जिक्र करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश में दस्त से पीड़ित लगभग 50.7 प्रतिशत बच्चों को ही ओआरएस मिल पाता है, यानी आधे बच्चे इस जीवनरक्षक घोल से वंचित रह जाते हैं। वहीं प्रदेश में मात्र 13 फीसदी बच्चों को ही ओआरएस के साथ जिंक दिया जाता है। लगभग 17.6 प्रतिशत बच्चों को तो दस्त के दौरान कोई इलाज ही नहीं मिलता, जो एक गंभीर स्थिति को दर्शाता है।

25 से 31 जुलाई तक चलेगा जागरूकता अभियान

डॉ. अरुण आर्या और डॉ. अमितेश यादव ने बताया कि लगभग 72 प्रतिशत मामलों में अभिभावक बिना डॉक्टर की सलाह के बच्चों को एंटीबायोटिक दवाएं दे देते हैं, जो शरीर के लिए नुकसानदेह साबित होती हैं। विशेषज्ञों ने अपील की कि दस्त होने पर तुरंत ओआरएस देना शुरू करें, 14 दिनों तक जिंक दें और बच्चे का खान-पान जारी रखें। एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स कानपुर द्वारा 25 से 31 जुलाई 2026 तक पूरे शहर के अस्पतालों, स्कूलों और सार्वजनिक स्थानों पर विशेष ओआरएस जागरूकता अभियान चलाया जाएगा।

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