Baghpat News: 10 साल से चल रहा था फर्जी खनन रॉयल्टी का खेल, STF ने दबोचे 4 आरोपी
Baghpat News: उत्तर प्रदेश स्पेशल टास्क फोर्स (STF) को एक बड़े खनन फर्जीवाड़े का पर्दाफाश करने में सफलता मिली है। STF ने 16 जून 2026 को बागपत जिले से ऐसे गिरोह के चार सदस्यों को गिरफ्तार किया है, जो कथित रूप से असली खनन रॉयल्टी में बदलाव कर फर्जी रॉयल्टी दस्तावेज तैयार करते थे। अधिकारियों के अनुसार, इस अवैध गतिविधि से राज्य सरकार को लंबे समय से राजस्व का नुकसान पहुंच रहा था। मामले की गंभीरता को देखते हुए STF ने विस्तृत जांच शुरू कर दी है।
बागपत से हुई गिरफ्तारी, लैपटॉप और मोबाइल बरामद
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान नईम, तालिब, फिरोज और आरिफ के रूप में हुई है। इनमें तीन आरोपी बागपत के निवाड़ा गांव के निवासी हैं, जबकि आरिफ मेरठ का रहने वाला है। STF ने इनके कब्जे से एक लैपटॉप, चार्जर, माउस, एक कार, आठ मोबाइल फोन और 2430 रुपये नकद बरामद किए हैं। गिरफ्तारी बागपत के निवाड़ा स्थित इंडियन नर्सिंग होम के पास से की गई।
व्हाट्सएप से मिलती थी असली रॉयल्टी
पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि वे अपने सहयोगियों राहुल उर्फ राजा और आशुतोष से व्हाट्सएप के माध्यम से असली खनन रॉयल्टी (आईएसटीपी) प्राप्त करते थे। इसके बाद दस्तावेजों में तारीख और अन्य विवरण बदलकर फर्जी रॉयल्टी तैयार की जाती थी। फिर इन्हें पीडब्ल्यूडी और नगर निगम से जुड़े कर्मचारियों तथा ठेकेदारों को भेजा जाता था।
कई जिलों तक फैला था नेटवर्क
जांच में सामने आया कि यह नेटवर्क संभल, मेरठ, मुजफ्फरनगर, सहारनपुर, गौतमबुद्धनगर और गाजियाबाद समेत कई जिलों तक फैला हुआ था। आरोपियों का दावा है कि वे पिछले लगभग 10 वर्षों से यह काम कर रहे थे। उन्हें प्रति घन मीटर खनन सामग्री पर भुगतान मिलता था और इसका एक हिस्सा उनके सहयोगियों को दिया जाता था।
दरअसल, STF का कहना है कि फर्जी दस्तावेजों के जरिए ठेकेदारों और कुछ कर्मचारियों को अनुचित लाभ पहुंचाया जा रहा था, जिससे सरकारी राजस्व को भारी नुकसान हुआ। मामले में बागपत कोतवाली में विभिन्न धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। अब स्थानीय पुलिस और STF इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की जांच कर रही है।

