कुशीनगर: युद्ध के शोर में बुद्ध की शांति ही एकमात्र रास्ता, अंतरराष्ट्रीय बुद्धिस्ट कॉन्क्लेव में गूंजा अहिंसा का मंत्र
पडरौना/कुशीनगर। भगवान बुद्ध की महापरिनिर्वाण स्थली कुशीनगर में आयोजित ‘अंतरराष्ट्रीय बुद्धिस्ट कॉन्क्लेव-2026’ के तीसरे दिन वैश्विक शांति और सद्भाव की नई किरण दिखाई दी। मुख्य मंदिर परिसर में आयोजित पैनल चर्चा के दौरान दुनिया भर से आए बौद्ध भिक्षुओं, शोधकर्ताओं और चिंतकों ने वर्तमान समय में बढ़ते युद्धों और संघर्षों के बीच बुद्ध के सिद्धांतों को एकमात्र समाधान बताया।

मध्यम मार्ग से ही संभव है स्थायी शांति
“युद्ध के समय में बुद्ध की प्रासंगिकता” विषय पर आयोजित इस सत्र में वक्ताओं ने वर्तमान वैश्विक परिप्रेक्ष्य पर गहरी चिंता व्यक्त की। विद्वानों ने कहा कि आज जब विश्व परमाणु युद्ध और क्षेत्रीय संघर्षों के मुहाने पर खड़ा है, तब बुद्ध का ‘मध्यम मार्ग’ और करुणा का सिद्धांत मानवता को विनाश से बचा सकता है। चर्चा में इस बात पर बल दिया गया कि बुद्ध के उपदेश केवल आध्यात्मिक नहीं हैं, बल्कि वे सामाजिक और राजनीतिक संघर्षों को सुलझाने के लिए ‘संवाद और सहिष्णुता’ का प्रभावी हथियार हैं।

वैश्विक पर्यटन केंद्र के रूप में उभरता कुशीनगर
इस अवसर पर फाजिलनगर विधायक सुरेंद्र सिंह कुशवाहा ने सभी आगत अतिथियों का स्वागत किया। उन्होंने कुशीनगर के बढ़ते महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा ऐसे अंतरराष्ट्रीय आयोजनों से न केवल सांस्कृतिक पहचान सुदृढ़ होती है, बल्कि पर्यटन और निवेश के नए द्वार भी खुलते हैं। विधायक ने प्रदेश सरकार की सराहना करते हुए कहा कि कुशीनगर में हवाई और सड़क सुविधाओं का तेजी से विस्तार हो रहा है, जिससे यह स्थल वैश्विक पर्यटन के नक्शे पर चमक रहा है। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे भगवान बुद्ध की करुणा और अहिंसा को जीवन में उतारकर समाज में सकारात्मक बदलाव लाएं।
कॉन्क्लेव का मुख्य आकर्षण रहा प्रश्नोत्तर सत्र
सत्र के अंत में श्रोताओं और विद्वानों के बीच सीधा संवाद हुआ। युवाओं और शोधकर्ताओं ने भगवान बुद्ध के सिद्धांतों को आधुनिक कूटनीति (Diplomacy) में शामिल करने पर अपने विचार साझा किए। आयोजन समिति को सफल आयोजन के लिए बधाई देते हुए विधायक ने आशा व्यक्त की कि यह कॉन्क्लेव क्षेत्र के समग्र विकास में मील का पत्थर साबित होगा।
रिपोर्ट: राघवेंद्र मल्ल
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