पीएम मोदी के वीडियो मैसेज पर भड़का विपक्ष, खड़गे बोले- वीडियो जारी करने के बजाय दिन में संसद आएं प्रधानमंत्री
Sandesh Wahak Digital Desk: NEET परीक्षा धांधली को लेकर केंद्र सरकार और विपक्षी दलों के बीच सियासी घमासान और तेज हो गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा इस मुद्दे पर जारी किए गए वीडियो संदेश के बाद कांग्रेस सहित तमाम विपक्षी दलों ने तीखा हमला बोला है। विपक्ष का साफ कहना है कि केवल वीडियो संदेश देने से काम नहीं चलेगा, प्रधानमंत्री को खुद संसद के पटल पर आकर देश और छात्रों के सवालों का जवाब देना चाहिए।
सदन में दिया गया बयान ही माना जाएगा गंभीर
राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने पीएम के वीडियो संदेश पर तंज कसते हुए कहा कि अगर प्रधानमंत्री वाकई इस विषय पर संजीदा हैं, तो उन्हें संसद में आकर अपनी बात रखनी चाहिए। खड़गे ने कहा, रात के अंधेरे में वीडियो संदेश जारी करने के बजाय प्रधानमंत्री को दिन के उजाले में संसद के भीतर छात्रों और देश के सामने अपनी बात रखनी चाहिए, क्योंकि सदन में दिए गए बयान की ही संवैधानिक गंभीरता होती है।
कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने भी सरकार की देरी पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब देश का युवा सड़कों पर लाठियां खा रहा है, तब सरकार केवल औपचारिक बयानबाज़ी कर रही है। वहीं, कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल ने छात्रों की मांग का समर्थन करते हुए शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को तुरंत पद से बर्खास्त करने की मांग की। वरिष्ठ कांग्रेस नेता कुमारी शैलजा ने कहा कि विपक्ष की सबसे बड़ी पार्टी होने के नाते छात्रों के हक की आवाज़ संसद में उठाना कांग्रेस की नैतिक जिम्मेदारी है।
TMC, RJD और सपा ने भी साधा निशाना
तृणमूल कांग्रेस (TMC) सांसद सौगत रॉय ने पेपर लीक के खिलाफ नए कानून लाने की सरकारी योजना पर सवाल खड़े किए और पूछा कि सरकार आखिर शिक्षा मंत्री का इस्तीफा लेने में देरी क्यों कर रही है। राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के राज्यसभा सांसद मनोज कुमार झा ने सरकार पर सत्ता के अहंकार में डूबने का आरोप लगाते हुए कहा कि छात्रों की चिंताओं को सिर्फ बयानों से दूर नहीं किया जा सकता, इस पर संसद में खुली चर्चा होनी चाहिए।
समाजवादी पार्टी के प्रमुख नेता और सांसद रामगोपाल यादव ने जांच एजेंसियों की भूमिका पर सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि जब देश में ऐसे अपराधों से निपटने के लिए पहले से ही कानून मौजूद हैं, तो दोषियों के खिलाफ अब तक सख्त कदम क्यों नहीं उठाए गए?

