Mission 2027: यूपी में खत्म हुआ ‘चेहरे’ का सस्पेंस, बीजेपी अध्यक्ष नितिन नवीन का बड़ा ऐलान
Sandesh Wahak Digital Desk: उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर बिसात बिछनी शुरू हो गई है। जहां एक तरफ विपक्ष ‘पीडीए’ और ‘मिशन-2027’ की रणनीति बना रहा है। वहीं भाजपा ने नेतृत्व को लेकर सारी कशमकश खत्म कर दी है। बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने स्पष्ट कर दिया है कि उत्तर प्रदेश में अगला चुनाव मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के चेहरे पर ही लड़ा जाएगा।
“मुख्यमंत्री हैं, तो चेहरा भी वही होंगे”
एक निजी न्यूज़ चैनल को दिए इंटरव्यू में नितिन नवीन ने यूपी और उत्तराखंड के नेतृत्व को लेकर पूछे गए सवाल पर बेहद साफ रुख अपनाया। उन्होंने कहा योगी आदित्यनाथ वर्तमान में मुख्यमंत्री हैं और उनके नेतृत्व में सरकार शानदार काम कर रही है। निश्चित रूप से 2027 में वही हमारा चेहरा होंगे। जिस यूपी को कभी वसूली और अपराध के लिए जाना जाता था, आज वह बेहतर कानून व्यवस्था और एक्सप्रेसवे के लिए पहचाना जा रहा है। प्रधानमंत्री मोदी और मुख्यमंत्री योगी ने मिलकर यूपी को ‘उत्तम प्रदेश’ बनाने की प्रक्रिया को धरातल पर उतारा है।
2017 और 2022 से अलग होगी इस बार की रणनीति
बीजेपी के इस ऐलान के पीछे एक बड़ी रणनीतिक स्पष्टता नजर आ रही है।
2017: बीजेपी ने किसी चेहरे का ऐलान नहीं किया था और पीएम मोदी के नाम पर प्रचंड बहुमत हासिल किया था।
2022: चुनाव से पहले चेहरे को लेकर थोड़ी कशमकश थी, लेकिन बाद में योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में दोबारा सरकार बनी।
2027: इस बार चुनाव से लगभग डेढ़ साल पहले ही चेहरा घोषित कर बीजेपी ने विपक्ष के ‘भ्रम’ वाले हमलों की हवा निकाल दी है।
जीत का फॉर्मूला: लॉ एंड ऑर्डर और इन्फ्रास्ट्रक्चर
नितिन नवीन ने दावा किया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की ‘यूएसपी’ यानी कानून व्यवस्था (Law & Order) जमीन पर दिख रही है। इसके साथ ही ‘प्रधानमंत्री अन्न योजना’, बड़े पैमाने पर आ रहा निवेश (Investment) और बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर बीजेपी की सत्ता में हैट्रिक लगाने के लिए काफी है।
विपक्ष की घेराबंदी के बीच ‘ब्रह्मास्त्र’ की तरह योगी का चेहरा
सपा द्वारा ‘मिशन-2027’ का आगाज पश्चिमी यूपी से किए जाने के तुरंत बाद बीजेपी का यह बयान बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। बीजेपी ने संदेश दे दिया है कि वह अपने सबसे मजबूत चेहरे योगी आदित्यनाथ के साथ चुनावी मैदान में उतरेगी, जिनके नाम पर न केवल हिंदुत्व बल्कि सुशासन का वोट बैंक भी एकजुट रहता है।
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