धनंजय सिंह पर हमले के मामले में विधायक अभय सिंह और MLC विनीत सिंह बरी
Varanasi News: वाराणसी की एमपी-एमएलए (MP-MLA) कोर्ट ने पूर्वांचल के चर्चित गैंगवार और बाहुबल की राजनीति से जुड़े एक अहम मामले में बुधवार को अपना फैसला सुनाया। विशेष न्यायाधीश यजुवेंद्र विक्रम सिंह की अदालत ने साक्ष्य के अभाव में विधायक अभय सिंह और एमएलसी विनीत सिंह समेत सभी छह आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया है। मामला वर्ष 2002 में हुए उस हमले से जुड़ा है जिसने लखनऊ से लेकर बनारस तक की राजनीति में खलबली मचा दी थी।
घटना 4 अक्टूबर, 2002 की है, जब धनंजय सिंह जौनपुर की रारी सीट से निर्दलीय विधायक थे। धनंजय सिंह अपनी सफारी गाड़ी से वाराणसी के कैंट थाना क्षेत्र स्थित नदेसर से गुजर रहे थे। टकसाल सिनेमा के सामने बोलेरो सवार हमलावरों ने उनके काफिले पर गोलियों की बौछार कर दी। इस जानलेवा हमले में धनंजय सिंह, उनके गनर और चालक समेत कई लोग गंभीर रूप से घायल हो गए थे। धनंजय सिंह ने अपने पूर्व मित्र अभय सिंह और उनके साथियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई थी। बाद में इस मामले में एमएलसी विनीत सिंह का नाम भी जोड़ा गया।
दोस्ती से दुश्मनी तक का सफर
धनंजय सिंह और अभय सिंह की कहानी कभी लखनऊ यूनिवर्सिटी के गलियारों में गहरी दोस्ती से शुरू हुई थी, लेकिन वर्चस्व की जंग ने इन्हें कट्टर दुश्मन बना दिया। दोनों लखनऊ यूनिवर्सिटी की छात्र राजनीति में सक्रिय थे। टेंडर और ठेकों को लेकर दोनों के बीच दरार आई, जो बाद में हिंसक संघर्षों में बदल गई। धनंजय का दावा है कि अभय की वजह से उन पर मुकदमे लदे, जबकि अभय सिंह का तर्क है कि कई अपराधों में धनंजय की वजह से उन्हें घसीटा गया।
अदालत का फैसला और आरोपी
अदालत ने पाया कि अभियोजन पक्ष आरोपियों के खिलाफ पुख्ता सबूत पेश करने में विफल रहा। साक्ष्यों के अभाव में अदालत ने बेनिफिट ऑफ डाउट (संदेह का लाभ) देते हुए अभय सिंह (विधायक, गोसाईगंज, अयोध्या), विनीत सिंह (एमएलसी), संदीप सिंह, संजय सिंह रघुवंशी, विनोद सिंह और सतेन्द्र सिंह को बरी कर दिया। फैसले के वक्त धनंजय सिंह के साथ-साथ अभय सिंह और विनीत सिंह भी अदालत में मौजूद रहे। 24 साल पुराने इस मामले के खत्म होने से दोनों राजनीतिक दिग्गजों को बड़ी राहत मिली है।
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