22 दोषियों को फांसी सुनाने वाले जज के कोर्ट से करीब 100 मुकदमे ट्रांसफर, जानें क्या है मामला

Muzaffarnagar Court: उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में फास्ट ट्रैक कोर्ट संख्या-3 के जज रवि कुमार दिवाकर इन दिनों चर्चा में हैं। उन्होंने पिछले करीब पांच महीनों में नौ अलग-अलग मामलों में 22 दोषियों को फांसी की सजा सुनाई है। इन मामलों में हत्या समेत कई गंभीर अपराध शामिल हैं।

इसी बीच जिला जज बीरेंद्र कुमार सिंह ने फास्ट ट्रैक कोर्ट में चल रहे करीब 100 मुकदमों को रिकॉल कर दूसरे न्यायालयों में स्थानांतरित कर दिया है। इनमें कुख्यात बदमाश सुशील मूंछ, शौकीन गैंग और चीनू पंडित से जुड़े हत्या के मुकदमे भी शामिल बताए जा रहे हैं।

दो दशक पुराने केस भी थे विचाराधीन

फास्ट ट्रैक कोर्ट में 2007 से लेकर 2026 तक के कई हत्या के मामलों की सुनवाई चल रही थी। सुशील मूंछ के खिलाफ करीब 10 से 12 हत्या के मुकदमे होने की बात सामने आई है। वहीं, शौकीन गैंग के सदस्य और उसके भाई शाहनवाज को हाल ही में फांसी की सजा सुनाई गई थी।

इसके अलावा बागपत में एसटीएफ मेरठ की कार्रवाई में मारे गए बदमाश विपुल खूनी से जुड़ा मुकदमा और चीनू पंडित के खिलाफ हत्या का मामला भी इसी कोर्ट में चल रहा था।

सुरक्षा को लेकर जज ने जताई थी चिंता

लगातार कड़े फैसलों के चलते जज रवि कुमार दिवाकर का न्यायालय मुजफ्फरनगर ही नहीं, पूरे उत्तर प्रदेश में चर्चा में रहा। हालांकि करीब 100 मुकदमों को दूसरे कोर्ट में भेजने का प्रशासनिक या न्यायिक आधार अभी स्पष्ट नहीं हो सका है।

इससे पहले जज दिवाकर ने अपनी सुरक्षा को लेकर चिंता जताई थी। उन्होंने पुलिस महानिदेशक को पत्र भेजकर कहा था कि उनकी सुरक्षा में तैनात गनर को बिना उनकी जानकारी और सहमति के बदल दिया गया। उन्होंने इसे अपने और परिवार की सुरक्षा के लिहाज से गंभीर बताते हुए कार्रवाई की मांग की थी।

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