पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी पर विपक्ष ने सरकार को घेरा
Sandesh Wahak Digital Desk: मिडिल ईस्ट में जारी तनाव और वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की आसमान छूती कीमतों का असर अब भारतीय उपभोक्ताओं की जेब पर दिखने लगा है। 15 मई की सुबह से देशभर में पेट्रोल और डीजल के दामों में 3.00 से 3.60 रुपये प्रति लीटर तक की बड़ी बढ़ोतरी कर दी गई है। कीमतों में हुए इस अचानक इजाफे से आम जनता के घरेलू बजट पर दबाव बढ़ गया है। जहां विपक्ष इसे सरकार की नाकामी बता रहा है, वहीं सत्ता पक्ष इसे वैश्विक संकट के बीच एक अनिवार्य कदम करार दे रहा है।
आगे बढ़ना है तो साइकिल ही विकल्प है। pic.twitter.com/FDDpykbGrr
— Akhilesh Yadav (@yadavakhilesh) May 15, 2026
अखिलेश का तंज, कांग्रेस बोली- चुनाव खत्म, वसूली शुरू
ईंधन के दाम बढ़ते ही सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने साइकिल चलाते हुए अपना एक स्कैच पोस्ट कर तंज कसा कि साइकिल से बेहतर कुछ नहीं। वहीं, कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि जब कच्चे तेल की कीमतें कम थीं, तब जनता को राहत देने के बजाय सरकार ने उन्हें लूटा।
कांग्रेस ने अपने आधिकारिक हैंडल से तंज कसते हुए लिखा, महंगाई मैन ने फिर हंटर चलाया, चुनाव खत्म-वसूली शुरू। दूसरी ओर, बंगाल के नेता दिलीप घोष ने सरकार का बचाव करते हुए कहा कि पीएम मोदी ने वैश्विक युद्धों के बावजूद देश पर कम से कम बोझ पड़ने दिया है।
For years when international oil prices were soft or declining, the Indian National Congress had been urging that those benefits should be passed on to Indian consumers and that domestic prices of gas, petrol, and diesel should be reduced. That, however, did not happen and…
— Jairam Ramesh (@Jairam_Ramesh) May 15, 2026
जनता में बढ़ी बेचैनी और मिली-जुली प्रतिक्रिया
पेट्रोल-डीजल के साथ-साथ सीएनजी (CNG) के दामों में भी 2 रुपये प्रति किलो की वृद्धि की गई है। इस बढ़ोत्तरी पर आम उपभोक्ताओं की मिली-जुली राय सामने आ रही है। कुछ लोग इसे आर्थिक संकट की शुरुआत मानकर परेशान हैं, तो कुछ उपभोक्ताओं का कहना है कि वे मानसिक रूप से इस वृद्धि के लिए तैयार थे।
एक ग्राहक ने संतोष जताते हुए कहा कि दुनिया भर के हालात देखते हुए 3 रुपये की बढ़ोत्तरी कम ही है। हालांकि, अधिकांश मध्यमवर्गीय परिवारों का मानना है कि इससे माल ढुलाई महंगी होगी, जिसका सीधा असर आने वाले दिनों में खाद्य पदार्थों और अन्य आवश्यक वस्तुओं की कीमतों पर पड़ेगा।
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