कुलदीप सेंगर को सुप्रीम कोर्ट से झटका, जमानत रद्द कर वापस जेल भेजने का आदेश
Sandesh Wahak Digital Desk: सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को उन्नाव दुष्कर्म मामले के दोषी और पूर्व भाजपा विधायक कुलदीप सिंह सेंगर की राहत पर पानी फेर दिया है। जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जोयमाल्या बागची की पीठ ने दिल्ली हाईकोर्ट के उस फैसले को पूरी तरह रद्द कर दिया, जिसमें सेंगर की उम्रकैद की सजा को निलंबित करते हुए उसे जमानत दी गई थी। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि सेंगर को फिलहाल जेल में ही रहना होगा और मामले को नए सिरे से सुनवाई के लिए वापस हाईकोर्ट भेज दिया है।
लोक सेवक की परिभाषा पर हाईकोर्ट का रुख गलत
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली हाईकोर्ट के उस तर्क को खारिज कर दिया, जिसमें कहा गया था कि एक विधायक लोक सेवक की श्रेणी में नहीं आता। जस्टिस बागची ने हाईकोर्ट के नजरिए को जरूरत से ज्यादा तकनीकी बताया। शीर्ष अदालत ने हाईकोर्ट को निर्देश दिया है कि वह पॉक्सो एक्ट के तहत विधायक की भूमिका और सजा पर फिर से विचार करे। कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट को आगामी 2 महीने के भीतर याचिका पर अंतिम फैसला लेने की कोशिश करने को कहा है।
केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने हाईकोर्ट के जमानत आदेश का कड़ा विरोध किया था। इससे पहले जब दिसंबर में हाईकोर्ट ने सजा निलंबित की थी, तब पीड़िता और समाज के विभिन्न वर्गों में भारी आक्रोश देखा गया था। सेंगर के वकील ने दलील दी थी कि घटना के वक्त पीड़िता नाबालिग नहीं थी, जिसे अदालत ने मौजूदा संदर्भ में स्वीकार नहीं किया। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से पीड़िता को न्याय की उम्मीद फिर से जगी है, जबकि सेंगर की मुश्किलें एक बार फिर बढ़ गई हैं।

