प्रतापगढ़ में शोर पर लगाम की तैयारी, प्रशासन ने जारी किए सख्त निर्देश
Pratapgarh News: जनपद में बढ़ते ध्वनि प्रदूषण और इसके जनस्वास्थ्य पर पड़ते घातक प्रभावों को देखते हुए प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया है। सामाजिक वानिकी एवं वन्यजीव प्रभाग द्वारा पुलिस और नगर निकायों के समन्वय से विशेष दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। हालांकि, इस कार्रवाई के साथ ही प्रशासनिक साख पर सवाल भी उठ रहे हैं, क्योंकि जिले में ईंट-भट्टों से होने वाले प्रदूषण और भ्रष्टाचार के चलते पहले की गई कार्रवाइयों का ट्रैक रिकॉर्ड निराशाजनक रहा है।
यह पूरी कार्रवाई नेचुरल ग्रीन फ्यूचर ट्रस्ट के अध्यक्ष और राज्य युवा पुरस्कार विजेता पर्यावरणविद् सुन्दरम तिवारी के विस्तृत पत्र के बाद शुरू हुई है। उन्होंने राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) और न्यायालयों के आदेशों का हवाला देते हुए जिले में ध्वनि प्रदूषण (विनियमन और नियंत्रण) नियम, 2000 को प्रभावी ढंग से लागू करने की मांग की थी।
साइलेंट किलर है शोर
सुन्दरम तिवारी ने अपने पत्र में वैज्ञानिक तथ्यों के साथ बताया कि विवाह समारोहों और धार्मिक आयोजनों में बजने वाले बेतहाशा DJ और लाउडस्पीकर केवल अनिद्रा या तनाव का कारण नहीं हैं, बल्कि यह ‘साउंडस्केप इकोलॉजी’ (प्राकृतिक ध्वनि संतुलन) को बिगाड़ रहे हैं।
पक्षियों पर असर: तेज शोर से पक्षियों की प्राकृतिक संचार प्रणाली प्रभावित होती है, जिससे वे अपना आवास छोड़ने को मजबूर हो जाते हैं।
जैव विविधता: शोर के कारण वन्यजीवों में ‘क्रॉनिक स्ट्रेस’ पैदा होता है, जिससे उनकी प्रतिरक्षा प्रणाली और प्रजनन क्षमता कमजोर हो जाती है।
WHO की चेतावनी: विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, रात में 40 dB से अधिक का शोर सेहत के लिए खतरनाक है, जबकि जिले में इसका स्तर अक्सर सीमाएं लांघ जाता है।
अब इन नियमों का करना होगा पालन
जारी किए गए नए दिशा-निर्देशों में प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि नियमों की अनदेखी करने वालों पर दंडात्मक कार्रवाई होगी।
रात्रि 10 बजे के बाद: लाउडस्पीकर और ध्वनि विस्तारक यंत्रों के प्रयोग पर पूरी तरह प्रतिबंध।
अनुमति प्रणाली: DJ और लाउडस्पीकर के संचालन के लिए पूर्व प्रशासनिक अनुमति अनिवार्य।
नियमित निगरानी: ध्वनि स्तर की समय-समय पर माप की जाएगी और उल्लंघन पर त्वरित कार्रवाई होगी।
जागरूकता: केवल दंड नहीं, बल्कि जन-जागरूकता अभियानों के जरिए जनता को इसके दुष्प्रभावों के प्रति सचेत किया जाएगा।
पर्यावरण प्रेमियों ने इस पहल का स्वागत किया है, लेकिन असली चुनौती इस निर्देश के जमीनी अनुपालन की है, ताकि प्रतापगढ़ के नागरिकों को एक शांत और स्वस्थ वातावरण मिल सके।
रिपोर्ट- विनोद मिश्र
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