राम मंदिर चढ़ावा चोरी: ट्रस्ट ने बैंक पर ही फोड़ दिया पूरा ठीकरा, अपने जिम्मेदारों पर चुप्पी क्यों?
Ram Mandir donation row: राम मंदिर के चढ़ावा चोरी मामले में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की बैठक में पूरे प्रकरण की समीक्षा की गई। बैठक के बाद जारी आधिकारिक बयान में ट्रस्ट ने स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) की कार्यप्रणाली और लापरवाही को इस घटना का प्रमुख कारण बताया। हालांकि, बैठक में ट्रस्ट के भीतर हुई कथित चूक, जिम्मेदार पदाधिकारियों की भूमिका और एसआईटी रिपोर्ट में उठाए गए सवालों पर कोई चर्चा नहीं की गई।
ट्रस्ट के अनुसार, SBI के साथ हुए एमओयू के तहत बैंक की कई जिम्मेदारियों का सही तरीके से पालन नहीं किया गया। बैठक में कहा गया कि बैंक ने तय नियमों और प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया, जिससे चढ़ावे की गणना में अनियमितताएं हुईं। ट्रस्ट ने इस पर नाराजगी जताते हुए भविष्य में ऐसी घटनाएं रोकने के लिए नियमों को और सख्त बनाने का फैसला किया।
SIT रिपोर्ट के सवालों पर नहीं हुई चर्चा
हालांकि, SIT की जांच रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया था कि एमओयू की कुछ शर्तों में कथित तौर पर तत्कालीन ट्रस्टी अनिल मिश्रा की ओर से ढील बरती गई थी, जिससे चोरी की घटना संभव हुई। इसके बावजूद बैठक में इस पहलू पर कोई चर्चा नहीं हुई।
इसी तरह, ‘राम मंदिर चढ़ावा चोरी’ जांच में बैंक अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका भी संदिग्ध बताई गई है, लेकिन उनके खिलाफ अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। पुलिस का कहना है कि मामले की विवेचना अभी जारी है।
टिन्नू यादव की भूमिका पर भी चुप्पी
बैठक में यह सवाल भी नहीं उठाया गया कि आखिर टिन्नू यादव को दान पात्रों और गणना कक्ष की चाबियों जैसे महत्वपूर्ण अधिकार क्यों दिए गए थे। जांच एजेंसियों के मुताबिक, यही व्यवस्था चोरी की बड़ी वजहों में से एक मानी जा रही है।
बैठक में निर्णय लिया गया कि ट्रस्ट की वित्त समिति जल्द ही बैंक अधिकारियों के साथ बैठक करेगी। एमओयू की सभी शर्तों की समीक्षा कर उन्हें और मजबूत बनाया जाएगा, ताकि भविष्य में चढ़ावे के प्रबंधन में किसी तरह की अनियमितता की गुंजाइश न रहे।
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