एक ही बात बार-बार सोचकर परेशान हैं? ऐसे निकलिए ओवरथिंकिंग के चक्र से

Repetitive Thinking: किसी पुरानी बात को बार-बार याद करना या भविष्य में होने वाली घटना को लेकर लगातार चिंता करना कभी-कभार सामान्य है। लेकिन जब एक ही विचार बार-बार लौटकर नींद, काम, ध्यान और मानसिक शांति पर असर डालने लगे, तो इसे रिपीटेटिव थिंकिंग कहा जाता है। इसका एक रूप रूमिनेशन है, जिसमें व्यक्ति बीती घटनाओं, गलतियों या नकारात्मक भावनाओं में उलझा रहता है।

विचारों से दूरी बनाने की कोशिश करें

सबसे पहले अपना ध्यान वर्तमान पर लाने की कोशिश करें। किसी विचार को जबरदस्ती रोकने के बजाय उसे पहचानें और गुजरने दें। पजल, चेस, वीडियो गेम, पेटिंग या डांस जैसी गतिविधियां ध्यान को दूसरी तरफ लगाने में मदद कर सकती हैं।

अगर कोई बात बार-बार परेशान कर रही है तो उसे कागज पर लिख लें। इसके बाद उसे सुरक्षित जगह रख दें। इससे विचारों से कुछ दूरी बनाने में मदद मिल सकती है।

एक ही बात बार-बार सोचकर परेशान हैं? ऐसे निकलिए ओवरथिंकिंग के चक्र से
एक ही बात बार-बार सोचकर परेशान हैं? ऐसे निकलिए ओवरथिंकिंग के चक्र से

 


एक और तरीका है ‘चिंता का समय’ तय करना। विचार आने पर खुद से कहें कि अभी नहीं, तय समय पर इस बारे में सोचेंगे। फिर उसी समय समस्या और उसके संभावित समाधान पर ध्यान दें।

एक्सरसाइज और माइंडफुलनेस अपनाएं

नियमित एक्सरसाइज ओवरथिंकिंग और चिंता से राहत देने में मदद कर सकती है। इसके साथ माइंडफुलनेस और गहरी सांस लेने का अभ्यास करें। इससे ध्यान वर्तमान में लाने और तनाव कम करने में मदद मिल सकती है।

नींद को नजरअंदाज न करें

पर्याप्त नींद भी जरूरी है। नियमित स्लीप साइकिल बनाए रखने से फोकस बेहतर करने और मानसिक आराम पाने में मदद मिल सकती है।

रिपीटेटिव थिंकिंग रोकने का मतलब हर नकारात्मक विचार को दिमाग से निकालना नहीं है। लक्ष्य विचार को पहचानना और जरूरत पड़ने पर ध्यान को सकारात्मक कार्रवाई की ओर ले जाना है। अगर ये विचार रोजमर्रा की जिंदगी को गंभीर रूप से प्रभावित कर रहे हैं, तो मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से मदद लेना उचित है।

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