कम या ज्यादा नींद दोनों हो सकती हैं नुकसानदायक, जानिए कितने घंटे सोना माना जाता है बेहतर
Sleep Duration: आज की व्यस्त जीवनशैली में लोग अक्सर नींद से समझौता कर लेते हैं। देर रात तक काम, मोबाइल का ज्यादा इस्तेमाल और तनाव के कारण पर्याप्त नींद नहीं मिल पाती। लेकिन नई स्टडी बताती हैं कि नींद सिर्फ आराम का समय नहीं है, बल्कि यह शरीर की मरम्मत, दिमाग की कार्यक्षमता और उम्र बढ़ने की प्रक्रिया से भी जुड़ी है।
शोध के अनुसार, रोजाना 6.4 से 7.8 घंटे की नींद लेने वालों में बायोलॉजिकल एजिंग (Biological Aging) की रफ्तार अपेक्षाकृत धीमी हो सकती है, जबकि बहुत कम या बहुत ज्यादा नींद नुकसान पहुंचा सकती है।
क्या होती है बायोलॉजिकल एजिंग
मायो क्लिनिक के अनुसार, जन्म से बढ़ने वाली उम्र को क्रोनोलॉजिकल एज कहा जाता है, जबकि शरीर के अंगों और कोशिकाओं की वास्तविक स्थिति बायोलॉजिकल एज कहलाती है। एक ही उम्र के दो लोगों की बायोलॉजिकल एज अलग हो सकती है। यह आहार, शारीरिक गतिविधि, तनाव और नींद जैसी आदतों पर निर्भर करती है। वैज्ञानिकों का कहना है कि खराब नींद शरीर में सूजन, ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस और कोशिकाओं को नुकसान बढ़ा सकती है।
दिमाग और शरीर पर पड़ता है असर
एनसीबीआई की स्टडी के मुताबिक, लगातार कम नींद लेने से याददाश्त और सोचने-समझने की क्षमता प्रभावित हो सकती है। वहीं, दूसरी स्टडी बताती है कि नींद के दौरान दिमाग हानिकारक अपशिष्ट पदार्थों को बाहर निकालने का काम करता है। नेचर में प्रकाशित शोध के अनुसार, अच्छी नींद हार्मोनल संतुलन बनाए रखने, टिश्यू की मरम्मत और प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करने में मदद करती है। कम नींद लेने से हृदय, लिवर, किडनी और मेटाबॉलिक सिस्टम पर भी नकारात्मक असर पड़ सकता है।
अच्छी नींद के लिए अपनाएं ये आदतें
विशेषज्ञों के अनुसार रोजाना एक तय समय पर सोएं और उठें। सोने से पहले मोबाइल, लैपटॉप और अन्य स्क्रीन का इस्तेमाल कम करें। शाम के समय चाय, कॉफी और एनर्जी ड्रिंक से बचें। नियमित व्यायाम करें और शांत, अंधेरे व ठंडे कमरे में सोने की कोशिश करें। बेहतर नींद लंबे समय तक शरीर और दिमाग को स्वस्थ रखने में अहम भूमिका निभा सकती है।
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