मानव तस्करी के अंतरराष्ट्रीय सिंडिकेट पर UP ATS का प्रहार, 9 को 8-8 साल की जेल
अवैध घुसपैठ और जाली दस्तावेजों के जरिए महिलाओं की तस्करी करने वाले गिरोह को सजा, NIA/ATS कोर्ट ने सुनाया ऐतिहासिक फैसला
Sandesh Wahak Digital Desk: उत्तर प्रदेश एटीएस (ATS) की प्रभावी पैरवी और पुख्ता सबूतों के आधार पर न्यायालय ने अंतरराष्ट्रीय मानव तस्करी सिंडिकेट के 09 सदस्यों को कड़ी सजा सुनाई है। विशेष एनआईए/एटीएस कोर्ट ने इन सभी अभियुक्तों को अवैध घुसपैठ, जाली दस्तावेज तैयार करने और मानव तस्करी का दोषी पाते हुए 08-08 वर्ष के कठोर कारावास और जुर्माने से दंडित किया है।
गाजियाबाद रेलवे स्टेशन से हुआ था भंडाफोड़
इस सिंडिकेट का खुलासा 26 जुलाई 2021 को हुआ था, जब एटीएस ने गाजियाबाद रेलवे स्टेशन से मोहम्मद नूर उर्फ नुरुल इस्लाम, रहमतउल्ला और शबीउल्ला को गिरफ्तार किया था। इनके कब्जे से एटीएस ने 03 पीड़ितों को सकुशल बरामद किया था, जिनमें 02 नाबालिग लड़कियां भी शामिल थीं।
विवेचना में बेनकाब हुआ पूरा नेटवर्क
गिरफ्तारी के बाद एटीएस की गहन विवेचना में इस अंतरराष्ट्रीय गिरोह की परतें खुलती गईं। साक्ष्यों के आधार पर इस सिंडिकेट से जुड़े अन्य सदस्य अब्दुल शकूर, आले मियां, मो. इस्माईल, मो. रफीक, बप्पन उर्फ अरशद मियां और मो. हुसैन के नाम प्रकाश में आए, जिन्हें बाद में गिरफ्तार कर जेल भेजा गया।
सजा पाने वाले अभियुक्तों का विवरण
न्यायालय ने जिन 9 अभियुक्तों को सजा सुनाई है, उनमें रोहिंग्या और बांग्लादेशी घुसपैठिए शामिल हैं:
- शबीउल्ला (रोहिंग्या)
- रहमत उल्ला (रोहिंग्या)
- मो. इस्माईल (रोहिंग्या)
- मो. रफीक उर्फ रफीकुल इस्लाम (रोहिंग्या)
- मो. हुसैन (रोहिंग्या)
- मोहम्मद नूर उर्फ नुरुल इस्लाम (बांग्लादेशी)
- अब्दुल शकूर उर्फ गनी (बांग्लादेशी)
- आले मियां (बांग्लादेशी)
- बप्पन उर्फ अरशद मियां (त्रिपुरा, भारत)
एटीएस की प्रभावी पैरवी
एटीएस द्वारा प्रस्तुत वैज्ञानिक साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर माननीय विचारण न्यायालय ने 9 अप्रैल 2026 को यह फैसला सुनाया। सभी दोषियों पर 2500-2500 रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है। इस फैसले को एटीएस की बड़ी जीत और अंतरराष्ट्रीय सिंडिकेट के लिए कड़ा संदेश माना जा रहा है।

