मेरठ एसएसपी का प्रदर्शनकारियों को पीटते वीडियो वायरल, छात्रा मर्डर केस में प्रदर्शन के पीछे बड़ी साजिश का दावा
Meerut News: पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले में बीए की छात्रा ललिता गौतम हत्याकांड को लेकर उपजा जनाक्रोश अब एक बड़े प्रशासनिक विवाद में बदल गया है। सोशल मीडिया पर मेरठ के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अविनाश पांडेय के कई वीडियो तेजी से वायरल हो रहे हैं, जिसमें उनका एक बेहद कड़ा और आक्रामक रूप सामने आया है। वीडियो में पुलिस कप्तान न केवल प्रदर्शनकारियों को खदेड़ते और फटकारते दिख रहे हैं, बल्कि हिरासत में लिए गए लोगों पर पुलिस वाहन के भीतर और बाहर थप्पड़ बरसाते भी नजर आ रहे हैं। इस वीडियो के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर दलित समाज और विभिन्न संगठनों के लोग पुलिसिया कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए आईपीएस अधिकारी को ट्रोल कर रहे हैं।
यह पूरी घटना मेरठ कलक्ट्रेट के मुख्य प्रवेश द्वार की बताई जा रही है। वायरल वीडियो में देखा जा सकता है कि पुलिस ने कुछ प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेकर अपनी गाड़ी में बैठाया हुआ था, तभी एसएसपी वहां पहुंचते हैं और वाहन में चढ़कर कार्रवाई शुरू कर देते हैं। यहाँ तक कि गाड़ी का दरवाजा बंद करके भी लोगों को हटाने की कोशिश की जाती है। जब कलक्ट्रेट के सामने मुख्य मार्ग बंद होने से भीषण जाम लग गया और एसपी देहात अभिजीत कुमार के समझाने के बाद भी भीड़ उग्र होकर नारेबाजी करने लगी, तब एसएसपी ने खुद कमान संभाली। उन्होंने बेहद तल्ख लहजे में प्रदर्शनकारियों को चेतावनी देते हुए कहा, यह किसी के पिताजी की सड़क नहीं है। जिसे भी शिकायत है, वह सीधे आकर हमसे मिले, लेकिन रास्ता जाम करना बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
इस भाजपा सरकार में योगी राज में पीडीए होना गुनाह हो गया है। एक दलित समाज की बेटी को न्याय दिलाने के लिए शांतिपूर्वक धरने पर बैठे लोगों यह व्यवहार बाबा की सरकार में है @yadavakhilesh pic.twitter.com/EveRU0ViHX
— GURJAR MOHIT NAGAR (@Mohitnagar_sp) July 8, 2026
न्याय की मांग के बीच साजिश का खुलासा
आपको बता दें कि 15 मई को परीक्षा देने निकली बीए की छात्रा ललिता गौतम लापता हो गई थी, जिसका शव 17 मई को रोहटा थाना क्षेत्र के एक गन्ने के खेत से बरामद हुआ था। हालांकि, मेरठ पुलिस ने मुख्य आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था, लेकिन मृतका के परिजन और समाज के लोग मुख्य आरोपी के पूरे परिवार और अन्य सह-आरोपियों की तत्काल गिरफ्तारी व सख्त सजा की मांग को लेकर कलक्ट्रेट पर डटे हुए थे, जिसमें बड़ी संख्या में महिलाएं भी शामिल थीं।
लाठीचार्ज और थप्पड़बाजी के वीडियो पर मचे हंगामे के बाद एसएसपी अविनाश पांडेय ने मीडिया के सामने एक बड़ा खुलासा किया है। पुलिस कप्तान का दावा है कि इस पूरे प्रदर्शन के पीछे न्याय की मांग नहीं, बल्कि शहर की शांति व्यवस्था को भंग करने और अराजकता फैलाने की एक सोची-समझी साजिश थी। पुलिस जांच के अनुसार, भारतीय किसान यूनियन (अंबेडकर गुट) के राष्ट्रीय अध्यक्ष दिग्विजय सिंह भाटी ने इस पूरे बबाल की रूपरेखा तैयार की थी। भाटी पर पहले से ही 9 आपराधिक मामले दर्ज हैं और प्रशासन उस पर जिला बदर की कार्रवाई भी कर चुका है।
दलित बेटी की हत्या हुई है उसके लिए संवैधानिक तरीके से न्याय माँगना कोई अपराध नहीं है SSP मेरठ द्वारा रवि गौतम को हिरासत में लेकर मारपीट करने का अधिकार संविधान ने नहीं दिया है !
संविधान द्वारा दी गई ताकत का थोड़ा सा इस्तेमाल धर्म व लोगों की आस्था को सीडी बनाकर सत्ता पर कब्ज़ा… pic.twitter.com/QwDzcSpmtq
— (समण) Rajendra Pal Gautam (@AdvRajendraPal) July 8, 2026
पीड़ित परिवार को उकसाने और प्रलोभन देने का आरोप
एसएसपी ने आगे बताया कि इस साजिश में नोएडा के रवि गौतम नाम के व्यक्ति की संलिप्तता भी सामने आई है, जिस पर 4 आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं। इन बाहरी और असंवैधानिक तत्वों ने पीड़ित परिवार को गुमराह किया और मृतका के भाई को शस्त्र लाइसेंस दिलाने समेत कई तरह के प्रलोभन देकर धरने पर बैठने के लिए राजी किया। मेरठ पुलिस की तफ्तीश में यह भी बात सामने आई है कि प्रदर्शन में शामिल किए गए कई सीधे-साधे ग्रामीणों को तो यह भी मालूम नहीं था कि उन्हें किस मकसद से वहां लाया गया है। कुछ अराजनीतिक तत्व इस दुखद घटना को जातिगत और सामाजिक रंग देकर अपनी रोटियां सेकने की कोशिश कर रहे थे।
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