जैसलमेर बस अग्निकांड में 21 की मौत, डीएनए सैंपल मिलान के बाद ही मिलेंगे परिजन को मिलेंगे शव
Sandesh Wahak Digital Desk: राजस्थान के जैसलमेर-जोधपुर हाईवे पर मंगलवार को हुए भीषण बस अग्निकांड में मरने वालों का आंकड़ा बढ़कर 21 हो गया है। बताया जा रहा है कि स्लीपर बस में आग लगने के बाद 19 यात्री उसमें से निकल नहीं पाए और झुलसकर उनकी मौत हो गई, वहीं जोधपुर रेफर किए गए घायलों में से एक ने भी इलाज के दौरान दम तोड़ दिया।
यह हादसा इतना भीषण था कि शवों की पहचान करना लगभग असंभव है। इस दुखद स्थिति के कारण, मृतकों के डीएनए सैंपल लेने का कार्य शुरू कर दिया गया है। देर रात शवों को सेना के ट्रक से जोधपुर भेजा गया।
हादसे के बाद डीएनए जाँच में हो रही देरी को लेकर परिजनों में भारी रोष है। जैसलमेर से जोधपुर पहुँचे एक परिजन ने आईएएनएस से बात करते हुए कहा, कल रात से हम लोगों को परेशान किया जा रहा है, कोई हमारी सुनने वाला नहीं है और हम अपने परिवार के शव लेने के लिए परेशान हैं। परिजनों ने नाराजगी जताते हुए कहा कि अगर कोई ‘बड़ा आदमी’ होता तो रात को ही जांच हो जाती।
एसएन मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल बीएस जोधा ने बताया कि कुल पाँच लोगों को वेंटिलेटर पर रखा गया है, जिनकी हालत गंभीर है। डीएनए सैंपलिंग का कार्य शुरू हो गया है, जिसका मिलान परिजनों के सैंपल से किया जाएगा। इस कार्य को जल्द से जल्द पूरा करने का प्रयास किया जा रहा है, जिसके बाद ही शव परिजनों को सौंपे जाएंगे।
महात्मा गांधी अस्पताल की अधीक्षक फतेह सिंह भाटी ने उम्मीद जताई कि डीएनए टेस्टिंग का पूरा कार्य 24 घंटे के भीतर पूरा कर लिया जाएगा। वर्तमान में 15 मरीजों का इलाज महात्मा गांधी अस्पताल में चल रहा है, और 10 शवों को मोर्चरी में रखवाया गया है।

मॉडिफाइड बस में नहीं मिला निकलने का रास्ता
शुरुआती जांच में यह बात भी सामने आई है कि दुर्घटनाग्रस्त बस को मॉडिफाई (Modified) किया गया था। आरोप है कि अधिकारियों ने इस पर ध्यान नहीं दिया, जिसके कारण इतना बड़ा हादसा हो गया, क्योंकि आग लगने पर यात्री बस से बाहर नहीं निकल पाए।
स्थानीय विधायक रविन्द्र सिंह भाटी ने घटना पर दुख जताते हुए कहा कि यह वाकई दुखद है और फिलहाल प्रशासन की गलतियों को देखने के बजाय घायलों की सहायता करना पहली नैतिक जिम्मेदारी है। उन्होंने आश्वासन दिया कि जिनकी पहचान नहीं हो पाई है, उनकी पहचान जल्द ही की जा रही है।
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