पिछले कुछ महीने में ISRO से 100 वैज्ञानिकों के इस्तीफे, केंद्रीय मंत्री बोले- ‘ऐसे बहुत आय और गए…’
Sansesh Wahak Digital Desk: चंद्रयान-3 और गगनयान जैसे बड़े अंतरिक्ष मिशनों के बीच भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) से बड़ी संख्या में वैज्ञानिकों के इस्तीफे चर्चा का विषय बने हुए हैं। हाल के महीनों में करीब 100 से 120 वैज्ञानिकों और तकनीकी विशेषज्ञों के संगठन छोड़ने के बाद ISRO ने इस्तीफे और स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (VRS) के नियम सख्त कर दिए हैं। अब ग्रुप ‘A’ के वैज्ञानिकों और तकनीकी कर्मचारियों के इस्तीफे या VRS के आवेदन सामान्य तौर पर स्वीकार नहीं किए जाएंगे।
इसी बीच केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने पूरे मामले पर सरकार का पक्ष रखा। उन्होंने साफ कहा कि यह फैसला किसी विवाद की वजह से नहीं, बल्कि प्रशासनिक जरूरतों को ध्यान में रखकर लिया गया है।
केंद्रीय मंत्री बोले- “कई आए हैं, कई गए हैं”
जब केंद्रीय मंत्री से ISRO के नए मेमो और वैज्ञानिकों के लगातार इस्तीफों पर सवाल पूछा गया तो उन्होंने कहा कि यह पूरी तरह प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा है।
उन्होंने कहा, “नहीं, यह प्रशासनिक कारणों से है ताकि फ़ैसला ज़्यादा परिपक्व स्तर पर लिया जा सके।” उन्होंने कहा कि ISRO में बहुत बड़ी वर्कफ़ोर्स है; जैसे-जैसे लोग छोड़ते हैं, कई लोग जुड़ते भी हैं। उन्होंने कहा, “कई आए हैं, कई गए हैं।”
मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि किसी एक व्यक्ति के संगठन छोड़ने से ISRO की कार्यक्षमता या गगनयान जैसे महत्वाकांक्षी मिशनों पर कोई असर नहीं पड़ता। उन्होंने कहा कि ISRO की कार्य संस्कृति ऐसी है, जहां सेवानिवृत्त वैज्ञानिक भी जरूरत पड़ने पर परियोजनाओं से जुड़े रहते हैं और काम लगातार चलता रहता है।
आखिर क्यों कड़े किए गए ISRO के नियम?
14 जुलाई को जारी आंतरिक मेमो में ISRO ने स्पष्ट किया कि अब वैज्ञानिकों और वरिष्ठ तकनीकी कर्मचारियों के इस्तीफे या VRS के मामलों की अधिक सख्ती से समीक्षा होगी। माना जा रहा है कि गगनयान समेत कई अहम परियोजनाओं के दौरान अनुभवी वैज्ञानिकों के लगातार संगठन छोड़ने के बाद यह फैसला लिया गया।

अंतरिक्ष विभाग का मानना है कि इन मिशनों पर काम कर रहे वैज्ञानिकों के पास विशेष तकनीकी विशेषज्ञता होती है, जिसकी भरपाई कम समय में करना आसान नहीं है। ऐसे में अचानक इस्तीफों से परियोजनाओं की समय-सीमा और काम की निरंतरता प्रभावित हो सकती है।
निजी स्पेस कंपनियों की बढ़ती मांग बड़ी वजह
हालांकि ISRO या अंतरिक्ष विभाग ने वैज्ञानिकों के इस्तीफों की कोई आधिकारिक वजह नहीं बताई है, लेकिन WION की रिपोर्ट के मुताबिक भारत में तेजी से बढ़ रहे निजी अंतरिक्ष क्षेत्र (Private Space Sector) को इसकी बड़ी वजह माना जा रहा है।
देश में स्पेस स्टार्टअप और एयरोस्पेस कंपनियां अनुभवी ISRO वैज्ञानिकों को नेतृत्व और तकनीकी पदों पर नियुक्त कर रही हैं। सरकार की ओर से निजी कंपनियों को सैटेलाइट और लॉन्च व्हीकल परियोजनाओं में बढ़ावा मिलने के बाद अनुभवी विशेषज्ञों की मांग भी तेजी से बढ़ी है।
रिपोर्ट में पूर्व ISRO अधिकारियों के हवाले से कहा गया है कि केवल प्रशासनिक प्रतिबंध लगाकर इस समस्या का समाधान नहीं होगा। वैज्ञानिकों को संगठन में बनाए रखने के लिए करियर ग्रोथ, नेतृत्व, कार्य संस्कृति और बेहतर अवसरों पर भी ध्यान देना होगा।
पूर्व चेयरमैन डॉ. सोमनाथ भी निजी क्षेत्र से जुड़े
ISRO के पूर्व चेयरमैन डॉ. एस. सोमनाथ भी अब चेन्नई स्थित स्पेस स्टार्टअप अग्निकुल कॉसमॉस के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स में ऑब्जर्वर के रूप में शामिल हो चुके हैं। उनके कार्यकाल में चंद्रयान-3 की ऐतिहासिक लैंडिंग और आदित्य-L1 मिशन जैसे बड़े अभियान सफल हुए थे।
उनके निजी क्षेत्र से जुड़ने के सवाल पर भी केंद्रीय मंत्री ने भरोसा जताते हुए कहा कि किसी व्यक्ति के जाने से ISRO के बड़े मिशन नहीं रुकते और संगठन की कार्यप्रणाली निरंतर चलती रहती है।
यह पहली बार नहीं है जब ISRO से वैज्ञानिकों के संगठन छोड़ने का मुद्दा सामने आया हो। वर्ष 2017 में आरटीआई के आधार पर आई एक रिपोर्ट में बताया गया था कि उससे पहले के पांच वर्षों में करीब 300 वैज्ञानिक ISRO छोड़ चुके थे।
अब गगनयान जैसे मानव अंतरिक्ष मिशन की तैयारियों के बीच सरकार का मानना है कि अनुभवी वैज्ञानिकों को लंबे समय तक संगठन से जोड़े रखना बेहद जरूरी है। इसी उद्देश्य से इस्तीफों और VRS की प्रक्रिया को पहले से अधिक सख्त बनाया गया है।
Also Read: सोनम वांगचुक के अनशन पर अमेरिका से भी अपील, PM मोदी से की बातचीत की मांग

