KGMU का कमाल! शरीर में धंसी 4 सरियों के साथ पहुंचा मजदूर, 8 घंटे 40 मिनट की सर्जरी से बची जान
Lucknow News: लखनऊ के किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) के ट्रॉमा सेंटर ने एक बार फिर बेहद जटिल ऑपरेशन को सफल बनाकर एक मजदूर की जान बचाई है। फर्रुखाबाद के रहने वाले 39 वर्षीय मजदूर के शरीर में चार लोहे की सरिया आर-पार धंस गई थीं। हालत बेहद गंभीर थी, लेकिन डॉक्टरों की टीम ने करीब 8 घंटे 40 मिनट तक चली मुश्किल सर्जरी के बाद उसे नई जिंदगी दे दी। फिलहाल मरीज आईसीयू में भर्ती है और उसकी हालत स्थिर बताई जा रही है।
यह हादसा 13 जुलाई की सुबह लखनऊ के बादशाह नगर स्थित एक निर्माणाधीन इमारत पर हुआ। काम के दौरान ऊंचाई से गिरने पर मजदूर चार लोहे की सरियों पर जा गिरा। सरियां उसके शरीर के आर-पार हो गईं। स्थानीय लोगों ने सरियों को काटकर उसी स्थिति में घायल को तत्काल KGMU ट्रॉमा सेंटर पहुंचाया।
कई अहम अंगों के बेहद करीब से गुजरी थीं सरिया

जांच के दौरान सीटी स्कैन और एक्स-रे में पता चला कि लोहे की सरिया फेफड़े, डायाफ्राम, आमाशय (स्टमक), छोटी आंत, प्लीहा (स्प्लीन) और पेट की बड़ी रक्त वाहिकाओं के बेहद करीब से होकर निकली थीं। डॉक्टरों के मुताबिक ऑपरेशन के दौरान जरा सी चूक मरीज की जान के लिए खतरा बन सकती थी।
इसके बाद प्रो. डॉ. समीर मिश्रा और डॉ. नरेंद्र कुमार के नेतृत्व में विशेषज्ञों की टीम ने तत्काल सर्जरी शुरू की। ऑपरेशन के दौरान पहले छाती और पेट में जमा खून निकाला गया और बड़ी रक्त वाहिकाओं को सुरक्षित किया गया। इसके बाद बेहद सावधानी के साथ शरीर में धंसी बाकी सरियों को निकाला गया।
कई अंगों की करनी पड़ी मरम्मत
सर्जरी के दौरान डॉक्टरों को छोटी आंत में कई छेद मिले, जिन्हें जोड़कर ठीक किया गया और स्टोमा बनाया गया। आमाशय के दोनों ओर हुए छिद्रों की भी मरम्मत की गई। इसके अलावा प्लीहा की चोट का इलाज किया गया और दोनों तरफ के डायाफ्राम की भी मरम्मत करनी पड़ी।
ऑपरेशन के दौरान अत्यधिक रक्तस्राव होने पर मरीज को 3 यूनिट पैक्ड रेड ब्लड सेल्स और 4 यूनिट फ्रेश फ्रोजन प्लाज्मा चढ़ाया गया। सुबह 7 बजे शुरू हुई सर्जरी दोपहर करीब 3:40 बजे पूरी हुई। सफल ऑपरेशन के बाद मरीज को आईसीयू में शिफ्ट किया गया, जहां उसका ब्लड प्रेशर, नाड़ी और ऑक्सीजन स्तर सामान्य है।
आर्थिक मदद से बिना रुके चला इलाज
KGMU प्रशासन के अनुसार मरीज आर्थिक रूप से कमजोर है। ऐसे में KGMU और चंदरानी जैन चैरिटेबल ट्रस्ट के संयुक्त प्रयास से उसे आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई गई, जिससे इलाज बिना किसी रुकावट के जारी रखा जा सका।
KGMU की कुलपति प्रो. सोनिया नित्यानंद ने सफल सर्जरी करने वाली पूरी मेडिकल टीम को बधाई देते हुए कहा कि ट्रॉमा सेंटर ने एक बार फिर त्वरित और उच्चस्तरीय आपातकालीन चिकित्सा सेवा का उदाहरण पेश किया है।

ट्रॉमा सेंटर की टीम ने लोगों से अपील की है कि यदि किसी हादसे में शरीर में कोई नुकीली वस्तु धंस जाए तो उसे खुद निकालने की कोशिश न करें। ऐसा करने से भारी रक्तस्राव हो सकता है और मरीज की जान को खतरा बढ़ सकता है। ऐसी स्थिति में घायल को उसी अवस्था में तुरंत अस्पताल पहुंचाना सबसे सुरक्षित तरीका होता है।
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