7 साल के मासूम से दरिंदगी के बाद हत्या, कोर्ट ने सिर्फ 14 दिन में सुनाई हत्यारे को फांसी की सजा

Bahraich News: एक मासूम की खेलने-कूदने की उम्र में जघन्य दरिंदगी और निर्मम हत्या का मामला एक बार फिर कानून व्यवस्था की तेज रफ्तार का उदाहरण बन गया है। उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले में 7 वर्षीय बालक धनंजय के साथ दुष्कर्म के बाद गंडासे से हत्या करने के आरोपी मुकेश निषाद (21) को विशेष POCSO फास्ट ट्रैक कोर्ट ने महज 14 कार्य दिवस में फांसी की सजा सुनाई है।

अदालत ने इस मामले को ‘रेयरेस्ट ऑफ रेयर’ करार देते हुए आरोपी पर एक लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया, जिसमें से आधी राशि पीड़ित परिवार को मुआवजे के रूप में देने का आदेश दिया गया है।

घटना क्या थी?

12 मई 2026 (कुछ रिपोर्ट्स में 2 मई की रात) को कैसरगंज थाना क्षेत्र के मंझारा तौकली गांव के दयालपुरवा मजरे में यह जघन्य वारदात हुई। गांव में आई बारात के मौके पर धनंजय अपने दो भाइयों के साथ DJ प्रोग्राम देखने गया था। देर रात घर लौटते समय पड़ोसी मुकेश निषाद ने तीनों भाइयों को साथ चलने को कहा।

दोनों बड़े भाई मना कर गए, लेकिन नन्हा धनंजय आरोपी के साथ चला गया। अगले दिन सुबह गांव से कुछ दूरी पर झाड़ियों में उसका क्षत-विक्षत शव मिला। गले पर गंडासे के वार और निजी अंगों पर चोटों के निशान थे।

सनसनीखेज मोटिव और DNA खुलासा

पुलिस जांच में चौंकाने वाला खुलासा हुआ। मुकेश निषाद गांव की एक लड़की के साथ अवैध संबंध में था। धनंजय ने उन्हें कम्प्रोमाइजिंग स्थिति में देख लिया और लड़की की मां को बता दिया। इससे मुकेश को गांव में शर्मिंदगी हुई। उसने धनंजय के परिवार को धमकी दी थी कि “बच्चे को नहीं छोड़ूंगा”।

बदले की भावना से आरोपी ने बच्चे को बहला-फुसलाकर ले जाकर पहले सोडोमी (गुदा दुष्कर्म) किया और फिर गंडासे से क्रूर हत्या कर दी। डीएनए रिपोर्ट ने दुष्कर्म की पुष्टि कर दी। पुलिस ने आरोपी के पास से हत्या का गंडासा और खून से सने कपड़े भी बरामद किए।

तेज न्याय की मिसाल

  • पीड़ित पिता लक्ष्मण निषाद की शिकायत पर तुरंत FIR दर्ज।
  • आरोपी को अगले ही दिन गिरफ्तार।
  • 20 जून 2026 को चार्जशीट दाखिल।
  • 22 जून को आरोप तय।

विशेष पॉक्सो कोर्ट के अपर सत्र न्यायाधीश अरविंद कुमार गौतम ने लगातार सुनवाई के बाद 23 जुलाई 2026 को फैसला सुनाया।

विशेष लोक अभियोजक संत प्रताप सिंह ने कहा, “वैज्ञानिक साक्ष्यों, डीएनए रिपोर्ट और मजबूत पैरवी के आधार पर अदालत ने इसे सबसे जघन्य अपराध मानते हुए सख्त सजा दी। ऐसे मामलों में तेज न्याय पीड़ित परिवार को राहत देता है और अपराधियों में कानून का डर पैदा करता है।”

मुकेश निषाद को हत्या (BNS 103(1)) और POCSO एक्ट की विभिन्न धाराओं के तहत दोषी करार देते हुए फांसी की सजा सुनाई गई। फैसले की प्रति हाईकोर्ट भेज दी गई है।

यह मामला उन दुर्लभ मामलों में शामिल है जहां उत्तर प्रदेश में POCSO फास्ट ट्रैक कोर्ट ने इतनी तेजी से “रेयरेस्ट ऑफ रेयर” अपराध पर मौत की सजा सुनाई है। पीड़ित परिवार को न्याय मिलने से इलाके में राहत की लहर है, लेकिन मासूम की मौत पूरे समाज के लिए सवाल छोड़ गई है।

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