बजट में हजारों करोड़, फिर भी बदहाल सरकारी स्कूल, संजय सिंह ने की जांच की मांग
Sanjay Singh: आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने सरकारी स्कूलों की स्थिति और शिक्षा योजनाओं के बजट को लेकर सवाल उठाए हैं। उन्होंने राज्यसभा की याचिका समिति के सामने शिकायत देकर मामले की जांच की मांग की है। उनका कहना है कि सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले गरीब और वंचित परिवारों के बच्चों को बिजली, शौचालय, पीने का पानी, इंटरनेट, कंप्यूटर और पौष्टिक भोजन जैसी जरूरी सुविधाएं मिलनी चाहिए।
संजय सिंह के मुताबिक, विद्यालय शिक्षा एवं साक्षरता विभाग की पांच केंद्र प्रायोजित योजनाओं के लिए 62,660 करोड़ के बजट अनुमान में से 13 फरवरी 2026 तक 32,296.54 करोड़ यानी करीब 51.5% राशि ही खर्च हुई। वहीं समग्र शिक्षा के 41,250 करोड़ के बजट का 54.9% उपयोग हुआ।
यूपी में 9,103 करोड़ खर्च नहीं होने का दावा
संजय सिंह ने दावा किया कि उत्तर प्रदेश में 2019-20 से 2021-22 के बीच करीब 9,103 करोड़ खर्च नहीं हुए। उन्होंने सवाल किया कि जब स्कूलों के सुधार के लिए बजट उपलब्ध था, तो उसका पूरा इस्तेमाल क्यों नहीं हुआ।
पीएम-पोषण योजना के आंकड़ों पर भी सवाल
आप सांसद ने पीएम-पोषण योजना को लेकर भी चिंता जताई। उनके अनुसार 2025-26 में 12,500 करोड़ के आवंटन में से 13 फरवरी 2026 तक 6,639.22 करोड़ खर्च हुए। बाद में संशोधित अनुमान 10,600 करोड़ कर दिया गया। उन्होंने बताया कि लाभार्थी बच्चों की संख्या 2022-23 के 12.16 करोड़ से घटकर 2024-25 में 10.99 करोड़ रह गई।
लखीमपुर खीरी और सीतापुर में मिड-डे मील से जुड़ी घटनाओं का हवाला देते हुए उन्होंने भोजन की गुणवत्ता, मात्रा और लाभार्थियों की नियमित जांच की मांग की। संजय सिंह ने कहा कि बच्चों की शिक्षा और पोषण पर खर्च होने वाला पैसा जनता का है और उनकी पार्टी इस मुद्दे को संसद से सड़क तक उठाती रहेगी।
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