युवाओं के दिल पर भारी पड़ रही बिगड़ी लाइफस्टाइल, SGPGI में बताया हार्ट का खतरा

Lucknow SGPGI: लखनऊ के एसजीपीजीआई में 8 सितंबर को हृदय रोग को लेकर विशेष कार्यक्रम हुआ। ‘ए हार्ट-टू-हार्ट डायलॉग- अंडरस्टैंडिंग द एशियन इंडियन हार्ट’ में विशेषज्ञों ने युवाओं में कम उम्र में बढ़ रहे हार्ट अटैक के मामलों पर चर्चा की। कार्यक्रम में ‘द ब्राउन हार्ट’ डॉक्यूमेंट्री के जरिए भारतीय हृदय की बदलती तस्वीर और उसके जोखिम समझाए गए।

केजीएमयू के पूर्व छात्र और अमेरिका के पेंसिल्वेनिया में कार्यरत चिकित्सक-फिल्मकार डॉ. निर्मल जोशी और डॉ. रेनू जोशी ने फिल्म के चुनिंदा हिस्से दिखाए। करीब 45 मिनट के सत्र में दक्षिण एशियाई लोगों में कम उम्र में हृदय रोग के पीछे आनुवंशिक कारणों के साथ जीवनशैली की भूमिका बताई गई।

दुनिया में हर तीसरी मौत हृदय रोग से

विशेषज्ञों के मुताबिक 2022 में सीवीडी से करीब 1.98 करोड़ लोगों की मौत हुई, जो दुनिया की कुल मौतों का करीब 32 प्रतिशत है। WHO के अनुमान के अनुसार भारत में करीब 27 प्रतिशत मौतें सीवीडी से जुड़ी हैं।

एसजीपीजीआई कार्डियोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. आदित्य कपूर ने कहा कि हृदय रोग पर बातचीत बीमारी के बाद नहीं, उससे पहले शुरू होनी चाहिए। संस्थान के निदेशक प्रो. आरके धीमान ने फास्ट फूड, प्रोसेस्ड डाइट, स्क्रीन टाइम, कम व्यायाम और तनाव को गंभीर खतरा बताया। उन्होंने कहा, “स्वास्थ्य कोई विलासिता नहीं, बल्कि रोज का चुनाव है।”

महिलाओं और युवाओं को खास सावधानी की जरूरत

डॉ. रूपाली खन्ना ने महिलाओं में हृदय रोग के लक्षणों को नजरअंदाज न करने की सलाह दी। डॉ. निर्मल जोशी ने कहा, “जीन बंदूक में गोली भर सकते हैं, लेकिन ट्रिगर अक्सर जीवनशैली दबाती है।”

विशेषज्ञों ने BP, शुगर, कोलेस्ट्रॉल, वजन और कमर की चौड़ाई पर नजर रखने, तंबाकू से दूर रहने, व्यायाम और तनाव नियंत्रण पर जोर दिया। डॉक्यूमेंट्री 100 घंटे से अधिक साक्षात्कार और चिकित्सा शोध पर आधारित है। प्रश्नोत्तर में डॉ. निर्मल जोशी, डॉ. रेनू जोशी, डॉ. आदित्य कपूर, डॉ. तेवारी, डॉ. रूपाली खन्ना और डॉ. अंकित साहू ने सवालों के जवाब दिए।

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