उच्च शिक्षा की लागत पर ट्रंप प्रशासन सख्त, 1.7 ट्रिलियन डॉलर के छात्र कर्ज पर जताई चिंता
Sandesh Wahak Digital Desk: अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने कॉलेज शिक्षा की आसमान छूती कीमतों को नियंत्रित करने के लिए अपनी सक्रियता बढ़ा दी है। अमेरिकी शिक्षा सचिव लिंडा मैकमोहन ने प्रतिनिधि सभा की समिति के समक्ष खुलासा किया कि देश के 4.3 करोड़ नागरिक वर्तमान में 1.7 ट्रिलियन डॉलर के विशाल छात्र ऋण के बोझ तले दबे हुए हैं। उन्होंने तर्क दिया कि बिना किसी नियंत्रण के दिए गए संघीय ऋणों ने ही विश्वविद्यालयों को फीस बढ़ाने की खुली छूट दी है।
सुनवाई के दौरान शिक्षा सचिव ने छात्र ऋण सुधारों का पुरजोर समर्थन किया। हालांकि, नर्सिंग, शिक्षण और सामाजिक कार्य जैसे स्नातकोत्तर कार्यक्रमों के लिए कर्ज की सीमा तय करने के प्रस्ताव पर डेमोक्रेटिक नेताओं ने कड़ी आपत्ति जताई। विपक्षी सांसदों का तर्क है कि इस कदम से स्वास्थ्य और सामाजिक क्षेत्र में कर्मियों की कमी और गहरा जाएगी, क्योंकि छात्रों को मजबूरी में महंगे निजी बैंकों से कर्ज लेना पड़ेगा।
शिक्षा सचिव मैकमोहन ने इन दावों को खारिज करते हुए कहा कि ऋण सीमा तय करने से विश्वविद्यालयों पर ट्यूशन फीस घटाने का दबाव बनेगा। उन्होंने यह भी दावा किया कि नई नीतियों के संकेत मिलते ही कुछ संस्थानों ने अपनी फीस कम करनी शुरू कर दी है। इसके अलावा, प्रशासन ने FAFSA (छात्र सहायता प्रणाली) को सरल बनाया है, जिससे आवेदन का समय घटकर मात्र 35 मिनट रह गया है। साथ ही, तकनीक और एआई की मदद से करीब 1 अरब डॉलर के फर्जी ऋण आवेदनों को रोककर धोखाधड़ी पर लगाम लगाई गई है।
रिपब्लिकन सदस्यों ने इन बदलावों को जवाबदेही बहाल करने वाला बताया है, जबकि विरोधियों का कहना है कि यह गरीब तबके की शिक्षा तक पहुंच को बाधित करेगा। यह मुद्दा भारतीय छात्रों के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि अमेरिका में उच्च शिक्षा और पेशेवर डिग्री की लागत में किसी भी बदलाव का सीधा असर वहां पढ़ रहे अंतरराष्ट्रीय विद्यार्थियों के भविष्य और बजट पर पड़ेगा।
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