‘वोटर लिस्ट’ पर आर-पार: सपा ने निर्वाचन आयोग को घेरा, कहा- योग्य मतदाताओं को बनाया जा रहा अयोग्य

Sandesh Wahak Digital Desk: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले मतदाता सूची को लेकर सियासी घमासान छिड़ गया है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के निर्देश पर प्रदेश अध्यक्ष श्याम लाल पाल ने मुख्य निर्वाचन अधिकारी को ज्ञापन सौंपकर गंभीर आरोप लगाए हैं। सपा का दावा है कि ‘नो-मैपिंग’ और ‘लॉजिकल एरर’ के नाम पर 3,50,436 मतदाताओं को अयोग्य घोषित कर दिया गया है, जो सीधे तौर पर लोकतंत्र के साथ खिलवाड़ है।

“DELETED Q” की मार्किंग और 2003 की मैपिंग का पेच

सपा के प्रतिनिधिमंडल ने ज्ञापन में बताया कि 10 अप्रैल 2026 को प्रकाशित मतदाता सूची में इन लाखों मतदाताओं के नाम के आगे ‘DELETED Q’ प्रिंट कर दिया गया है। सपा का कहना है कि नाम, उम्र या फोटो में मामूली त्रुटि (माइनर एरर) को ‘लॉजिकल एरर’ बताकर वैध मतदाताओं को बाहर किया जा रहा है। ये वे मतदाता हैं जो 2003 से लगातार मतदान कर रहे हैं और भारत के वैध नागरिक हैं। अब अचानक उन्हें अयोग्य ठहराना प्रशासनिक मंशा पर सवाल खड़े करता है।

समाजवादी पार्टी ने निर्वाचन आयोग के सामने दो प्रमुख मांगें रखी हैं। पहली मांग अयोग्य घोषित किए गए मतदाताओं की जनपदवार, विधानसभावार और बूथवार सूची सभी राजनीतिक दलों को तुरंत उपलब्ध कराई जाए। दूसरी मांग अयोग्य मतदाताओं को डीएम (DM) के पास अपील करने के लिए केवल 15 दिन (10 से 25 अप्रैल) का समय दिया गया है। सपा ने मांग की है कि इस समय सीमा को 15 दिन और बढ़ाया जाए ताकि कोई भी पात्र मतदाता वोट देने के अधिकार से वंचित न रहे।

प्रतिनिधिमंडल में शामिल नेता

मुख्य निर्वाचन अधिकारी को ज्ञापन सौंपने वाले दल में के.के. श्रीवास्तव, डॉ. हरिश्चन्द्र सिंह और राधेश्याम सिंह शामिल रहे, जिन्होंने मामले में त्वरित कार्रवाई की मांग की है। सपा का कहना है कि मतदाताओं को अयोग्य घोषित करने के कारणों की जानकारी भी उन्हें नहीं दी गई है। अगर समय रहते सुधार नहीं हुआ, तो लाखों मतदाता 2027 के विधानसभा चुनाव में मतदान नहीं कर पाएंगे। पार्टी ने इसे चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित करने की साजिश करार दिया है।

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