‘इबादत वही जो इंसानियत की सेवा करे’, प्रयागराज में सूफी संतों की ऐतिहासिक भूमिका पर मंथन

Sandesh Wahak Digital Desk: इलाहाबाद संग्रहालय के पंडित ब्रजमोहन व्यास ऑडिटोरियम में रविवार को सूफ़ी अकादमी ख़ानक़ाह सुहरवर्दिया चिश्तिया ख़लीलपुर शरीफ़ के तत्वावधान में एक भव्य राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया गया। “भारत की एकता और विकास में सूफ़ी संतों की भूमिका” विषय पर केंद्रित इस आयोजन में देश भर के विद्वानों ने शिरकत की और सूफ़ीवाद को भारतीय समाज की स्थिरता का आधार स्तंभ बताया।

‘इबादत वही जो इंसानियत की सेवा करे’, प्रयागराज में सूफी संतों की ऐतिहासिक भूमिका पर मंथन

सूफ़ीवाद: विविधता में एकता का सूत्र

सम्मेलन की अध्यक्षता कर रहे पद्मश्री प्रोफेसर अख्तरुल वासे ने अपने संबोधन में सूफ़ी विचारधारा की व्यापकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा “सूफ़ीवाद मनुष्य के अंतर्मन को शुद्ध कर उसे ईश्वर से जोड़ता है। धर्म का वास्तविक संदेश समाज को जोड़ना और प्रेम फैलाना है, न कि विभाजन करना।” उन्होंने शरीअत और तरीक़त के सुंदर समन्वय को सूफ़ीवाद की विशेषता बताया, जो शांतिपूर्ण सांस्कृतिक संवाद को बढ़ावा देता है।

‘इबादत वही जो इंसानियत की सेवा करे’, प्रयागराज में सूफी संतों की ऐतिहासिक भूमिका पर मंथन

मानव सेवा और सामाजिक समरसता

विभिन्न वक्ताओं ने सूफ़ी संतों के ऐतिहासिक योगदान को रेखांकित किया। प्रोफेसर अलीम अशरफ़ ख़ान ने “अल-ख़ल्क़ अयालुल्लाह” (समस्त मानवता ईश्वर का परिवार है) के सिद्धांत का उल्लेख करते हुए भारत को एक खूबसूरत गुलदस्ते की उपमा दी। संयोजक सैयद अनवार सफ़ी ने अतिथियों का स्वागत किया और कार्यक्रम का सुव्यवस्थित संचालन किया।

डॉ. फ़ाज़िल अहसन हाशमी ने प्रयागराज की ऐतिहासिक महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह नगर गंगा-जमुनी तहजीब की जीवंत मिसाल है, जहाँ सूफ़ी ख़ानक़ाहों ने नैतिक सुधार और सामाजिक समरसता की अलख जगाई।

‘इबादत वही जो इंसानियत की सेवा करे’, प्रयागराज में सूफी संतों की ऐतिहासिक भूमिका पर मंथन

पुस्तक लोकार्पण और आध्यात्मिक महफ़िल

इस अवसर पर सैयद अनवार सफ़ी की पुस्तक “अह्द-ए-हाज़िर में तसव्वुफ़ की मआनियत” का लोकार्पण किया गया। सम्मेलन के समापन पर क़व्वाली की महफ़िल सजी, जिसमें क़व्वाल ग़ुफ़रान असलमी और उनकी टीम ने आध्यात्मिक कलाम पेश कर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।

विद्वानों की गरिमामय उपस्थिति

सम्मेलन में प्रोफेसर सालेहा रशीद, प्रोफेसर सैयद सिराजुद्दीन अजमली, प्रोफेसर मसूद अनवर अलवी, प्रोफेसर उमर कमालुद्दीन सहित इलाहाबाद विश्वविद्यालय के शोधार्थियों और भारी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया। खचाखच भरा सभागार सूफ़ी विचारधारा के प्रति जन-रुचि का स्पष्ट प्रमाण था।

Also Read: जनता दर्शन में सीएम योगी ने अफसरों को चेताया, बोले- जनता की संतुष्टि ही आपकी सफलता

Get real time updates directly on you device, subscribe now.