इन दो ट्रेनों में शुरू हुई TTE की ‘Body Cam’ ड्यूटी, टिकट चेकिंग का हर पल होगा रिकॉर्ड

Train News: भारतीय रेलवे ने टिकट चेकिंग व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और विवाद मुक्त बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। अब TTE (Travelling Ticket Examiner) यात्रियों का टिकट चेक करते समय बॉडी वॉर्न कैमरा पहनेंगे। इस कैमरे में टिकट जांच के दौरान होने वाली पूरी बातचीत और गतिविधियां ऑडियो-वीडियो के साथ रिकॉर्ड होंगी।

उत्तर मध्य रेलवे ने फिलहाल इस व्यवस्था की शुरुआत प्रयोग के तौर पर दो ट्रेनों में की है। इनमें 12417-12418 प्रयागराज एक्सप्रेस और 12451-12452 श्रमशक्ति एक्सप्रेस शामिल हैं। उत्तर मध्य रेलवे के महाप्रबंधक के निर्देशन और प्रयागराज मंडल के डीआरएम रजनीश अग्रवाल के नेतृत्व में शुक्रवार रात से यह व्यवस्था लागू कर दी गई है।

कंधे पर कैमरा लगाकर टिकट चेक करेंगे TTE

नई व्यवस्था के तहत ड्यूटी के दौरान टीटीई अपने कंधे पर बॉडी वॉर्न कैमरा लगाए रहेंगे। कैमरे में एचडी वीडियो रिकॉर्डिंग, ऑडियो रिकॉर्डिंग, नाइट विजन, लंबा बैटरी बैकअप और टैंपर-प्रूफ रिकॉर्डिंग जैसी आधुनिक सुविधाएं मौजूद हैं।

रेलवे अधिकारियों का कहना है कि कई बार टिकट जांच के दौरान यात्रियों और टीटीई के बीच विवाद या शिकायतें सामने आती हैं। ऐसे मामलों में कैमरे की रिकॉर्डिंग निष्पक्ष साक्ष्य के रूप में काम करेगी और सही तथ्य सामने लाने में मदद करेगी।

रेलवे ने बताए इस व्यवस्था के बड़े फायदे

रेल प्रशासन के अनुसार बॉडी कैमरा लागू होने से कई तरह के लाभ होंगे।

  • टिकट चेकिंग प्रक्रिया का डिजिटल और पारदर्शी रिकॉर्ड उपलब्ध रहेगा।
  • यात्रियों और टीटीई, दोनों के अधिकारों की सुरक्षा होगी।
  • फर्जी शिकायतों और अनावश्यक विवादों में कमी आएगी।
  • शिकायतों और अपीलों का निस्तारण साक्ष्यों के आधार पर तेजी से हो सकेगा।
  • कर्मचारियों के व्यवहार और कार्यप्रणाली का बेहतर मूल्यांकन किया जा सकेगा।
  • सुरक्षा संबंधी घटनाओं या संदिग्ध गतिविधियों की रिकॉर्डिंग जांच एजेंसियों और आरपीएफ के लिए अहम सबूत साबित होगी।
  • रेलवे के प्रति यात्रियों का भरोसा और मजबूत होगा।

कांसगंज-दिल्ली इंटरसिटी एक्सप्रेस में भी बड़ा बदलाव

रेलवे ने एक और बड़ा फैसला लेते हुए कांसगंज-नई दिल्ली इंटरसिटी एक्सप्रेस में एलएचबी (LHB) कोच लगाने का भी ऐलान किया है। 22 अगस्त से यह ट्रेन एलएचबी रैक के साथ संचालित होगी।

अभी तक ट्रेन में 18 आईसीएफ कोच लगाए जाते थे, लेकिन अब 16 एलएचबी कोच होंगे। रेलवे के मुताबिक एलएचबी कोच अधिक सुरक्षित होते हैं और इनमें यात्रियों के लिए सीट क्षमता भी बेहतर होती है।

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