अब कंपनियों को पैक्ड फूड पर प्रिंट करना होगा कलर-कोडेड न्यूट्रिशन लेबल, रंग बताएगा खाना हेल्दी या नहीं

FSSAI: अगर आप चिप्स, बिस्कुट, कोल्ड ड्रिंक, नमकीन या दूसरे पैक्ड फूड खरीदते हैं, तो आने वाले समय में इन्हें समझना पहले से कहीं आसान हो सकता है। अब पैकेट पर लाल, पीला और हरा रंग देखकर ही पता चल जाएगा कि कोई खाद्य पदार्थ आपकी सेहत के लिए कितना सही या कितना नुकसानदायक है।

दरअसल, संसद की एक स्थायी समिति ने FSSAI (भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण) से कहा है कि वह फ्रंट-ऑफ-पैक न्यूट्रिशन लेबलिंग (FOPNL) यानी पैकेट के सामने आसान भाषा और रंगों के जरिए पोषण संबंधी जानकारी देने के नियम जल्द लागू करे। समिति का कहना है कि मसौदा नियम आए दो साल से ज्यादा हो चुके हैं, लेकिन अब तक इन्हें लागू नहीं किया गया।

क्या है पूरा मामला?

संसदीय समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि देश में पैक्ड और प्रोसेस्ड फूड (फैक्ट्री में तैयार और पैक किया गया खाना) का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है। ऐसे में लोगों को यह आसानी से पता चलना चाहिए कि वे जो चीज खरीद रहे हैं, उसमें चीनी, नमक और फैट (वसा) कितनी मात्रा में है।

समिति ने FSSAI की धीमी प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कहा कि सितंबर 2022 में नियमों का मसौदा जारी किया गया था। इसके बाद करीब 14,000 सुझाव और आपत्तियां मिलीं, लेकिन दो साल से ज्यादा समय बीतने के बाद भी नियम लागू नहीं हो सके।

अभी पैकेट पर क्या दिक्कत है?

फिलहाल ज्यादातर पैक्ड फूड के पीछे छोटे-छोटे अक्षरों में पोषण संबंधी जानकारी लिखी होती है। उसमें ग्राम, प्रतिशत और RDA (Recommended Daily Allowance – रोजाना की सुझाई गई मात्रा) जैसे तकनीकी आंकड़े दिए जाते हैं।

आम लोगों के लिए खरीदारी करते समय इन आंकड़ों को समझना आसान नहीं होता। यही वजह है कि कई बार लोग बिना सही जानकारी के ऐसे उत्पाद खरीद लेते हैं, जिनमें चीनी या अन्य तत्व जरूरत से ज्यादा होते हैं।

अब पैकेट पर दिख सकते हैं तीन रंग

संसदीय समिति ने सुझाव दिया है कि हर पैक्ड फूड पर सामने की तरफ रंगों के जरिए जानकारी दी जाए।

  • लाल रंग – ज्यादा चीनी या सेहत के लिए नुकसानदायक मात्रा वाले उत्पाद
  • पीला रंग – मध्यम स्तर की चीनी या पोषक तत्व वाले उत्पाद
  • हरा रंग – कम चीनी और अपेक्षाकृत बेहतर विकल्प

समिति ने यह भी कहा है कि जिन उत्पादों में चीनी बहुत ज्यादा हो, उन पर साफ और बड़े अक्षरों में चेतावनी (Warning Label) भी दी जानी चाहिए।

लोगों को क्या फायदा होगा?

अगर यह व्यवस्था लागू होती है तो लोगों को पैकेट पलटकर बारीक अक्षरों में लिखी जानकारी पढ़ने की जरूरत नहीं पड़ेगी। सिर्फ सामने बने रंग देखकर ही यह समझ आ जाएगा कि कौन-सा उत्पाद ज्यादा सुरक्षित है और कौन-सा कम।

इससे खासकर बच्चों और परिवार के लिए खाद्य पदार्थ खरीदने वाले लोगों को सही फैसला लेने में आसानी होगी।

संसदीय समिति ने साफ कहा है कि FSSAI को मिले सभी सुझावों की समीक्षा जल्द पूरी कर नियम लागू करने चाहिए। इससे देश में पैक्ड फूड खरीदने वाले करोड़ों उपभोक्ताओं को सरल, साफ और भरोसेमंद जानकारी मिल सकेगी और वे अपनी सेहत को ध्यान में रखकर बेहतर विकल्प चुन पाएंगे।

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