ट्रंप के टैरिफ ने अमेरिकी उपभोक्ताओं पर टैक्स की तरह काम किया: IMF की पूर्व मुख्य अर्थशास्त्री गीता गोपीनाथ
Sandesh Wahak Digital Desk: अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) की पूर्व मुख्य अर्थशास्त्री गीता गोपीनाथ ने बुधवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ (आयात शुल्क) प्रस्तावों की कड़ी आलोचना की है। गोपीनाथ ने साफ तौर पर कहा कि ट्रंप द्वारा लगाए गए शुल्क ने अमेरिकी उपभोक्ताओं पर टैक्स की तरह काम किया, जिसके कारण महंगाई बढ़ी, लेकिन अमेरिकी अर्थव्यवस्था को इससे कोई लाभ नहीं हुआ।
ट्रंप द्वारा 2 अप्रैल को टैरिफ बढ़ाने की घोषणा के दिन को लिबरेशन डे घोषित करने की आलोचना करते हुए गोपीनाथ ने कहा कि पिछले छह महीनों का स्कोरकार्ड नकारात्मक रहा है।
टैरिफ से किसे हुआ फायदा
गोपीनाथ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में सवाल उठाते हुए ट्रंप की व्यापार नीति के परिणामों का विश्लेषण किया।
क्या राजस्व बढ़ा? हाँ, लेकिन यह राजस्व मुख्य रूप से अमेरिकी कंपनियों द्वारा वहन किया गया, जिसे अंततः अमेरिकी उपभोक्ताओं पर पारित कर दिया गया। इस तरह, ट्रंप के इस फैसले ने यूएस फर्मों और उपभोक्ताओं पर टैक्स की तरह काम किया।
क्या महंगाई बढ़ी? हाँ, कुल मिलाकर थोड़ी मात्रा में। विशेष रूप से घरेलू उपकरणों, फर्नीचर और कॉफी के लिए महंगाई बढ़ी है।
क्या व्यापार संतुलन सुधरा? अभी तक कोई संकेत नहीं।
क्या अमेरिकी मैन्युफैक्चरिंग में सुधार हुआ? अभी तक कोई संकेत नहीं।
गोपीनाथ ने निष्कर्ष निकाला कि पिछले छह महीनों में टैरिफ से न तो व्यापार संतुलन में सुधार हुआ और न ही अमेरिका में मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा मिला, जैसा कि ट्रंप ने दावा किया था।
ट्रंप की टैरिफ नीतियाँ
ट्रंप ने अमेरिकी व्यापार घाटे को लेकर नेशनल इमरजेंसी घोषित की थी और विदेशी आयातों पर व्यापक टैरिफ लगाने के लिए इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट (IEEPA) लागू किया था। उनका उद्देश्य दशकों से चली आ रही अनुचित व्यापार बाधाओं को दूर करना था, जिससे अमेरिकी उत्पादकों को नुकसान हो रहा था।

