क्लास 8 की NCERT किताब में बड़ा फेरबदल! बंटवारे का जिक्र बदला, हिटलर हटे, सावरकर की एंट्री
NCERT revises class 8 textbook: NCERT ने क्लास 8 की सोशल साइंस की नई किताब जारी कर दी है। इस नए संस्करण में इतिहास और न्यायपालिका से जुड़े कई अहम बदलाव किए गए हैं। खास बात यह है कि 1947 के बंटवारे, नेताजी सुभाष चंद्र बोस, वीडी सावरकर, हिटलर और न्यायपालिका से जुड़े अध्यायों को नए तरीके से पेश किया गया है। इनमें कई पुराने हिस्से हटाए गए हैं और नई बातें जोड़ी गई हैं।
नई किताब में सबसे ज्यादा चर्चा उन बदलावों की है, जिनमें पहले की सामग्री और अब की सामग्री में बड़ा अंतर देखने को मिला है।
पहले क्या था, अब क्या बदला?
बंटवारे पर पहले क्या लिखा था?
- पहले किताब में लिखा था कि सांप्रदायिक हिंसा के बीच कांग्रेस नेताओं ने खुद को मजबूर महसूस किया और आखिरकार बंटवारे को स्वीकार किया।
- अब नई किताब में लिखा गया है कि कांग्रेस ने देश के बंटवारे का कड़ा विरोध किया था।
अंग्रेजों की भूमिका
- पहले लिखा था कि अंग्रेजों ने हिंदू और मुस्लिम नेताओं के बीच मतभेद का फायदा उठाकर देश का विभाजन कराया।
- अब इस हिस्से को नए तरीके से लिखा गया है और पुराना विवरण हटा दिया गया है।
नेताजी सुभाष बोस और हिटलर
- पहले किताब में उल्लेख था कि नेताजी ने सेना बनाने के लिए हिटलर से मदद मांगी थी और हिटलर को द्वितीय विश्व युद्ध का जिम्मेदार तानाशाह बताया गया था।
- अब हिटलर और नाजी शासन का सीधा जिक्र हटा दिया गया है। नई किताब में सिर्फ इतना लिखा गया है कि नेताजी ने ब्रिटिश विरोधी शक्तियों से सहयोग मांगा था।
सावरकर का जिक्र
- पहले किताब में वीडी सावरकर का उल्लेख नहीं था।
- अब नई किताब में लिखा गया है कि 1925 में सावरकर ने भी स्वराज की मांग की थी।
न्यायपालिका वाला अध्याय
- पहले किताब में न्यायपालिका से जुड़े कुछ मामलों और दो प्रमुख अदालत के फैसलों का जिक्र था, जिस पर विवाद हुआ था।
- अब वे हिस्से पूरी तरह हटा दिए गए हैं। उनकी जगह PIL, ट्रिब्यूनल और विवाद निपटाने के अन्य तरीकों की जानकारी दी गई है।
फरवरी में न्यायपालिका से जुड़े अध्याय को लेकर विवाद सामने आया था। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने किताब के उस संस्करण पर रोक लगा दी थी। बाद में NCERT ने माफी भी मांगी थी।
अब NCERT का कहना है कि नई किताब में किए गए बदलाव सुप्रीम कोर्ट के 16 मार्च 2026 के आदेश के बाद गठित विशेषज्ञ समिति की सिफारिशों के आधार पर किए गए हैं। नई किताब में आजादी की लड़ाई, बंटवारा और न्यायपालिका जैसे संवेदनशील विषयों को नए नजरिए से पेश किया गया है।
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